झाबुआ मेला हादसाः ड्रैगन झूला गिरा, 30 घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

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झाबुआ। जिले में चल रहे मेले के दौरान ड्रैगन झूला टूटने से मची अफरा-तफरी ने मनोरंजन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 30 लोग घायल हुए हैं, जिनमें अधिकांश स्कूली बच्चे हैं। प्रशासन जांच की बात कर रहा है, लेकिन जवाबदेही तय होना अभी बाकी है।
झाबुआ शहर के हाई सेकेंडरी ग्राउंड में लगे मेले में उस समय हड़कंप मच गया, जब ड्रैगन झूला अचानक तेज आवाज के साथ टूटकर नीचे गिर पड़ा। हादसे के वक्त झूले में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सवार थे। चीख-पुकार और भगदड़ के बीच स्थानीय लोगों ने घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
प्रशासन के अनुसार इस हादसे में घायलों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 15 बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि शेष का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि सभी की हालत फिलहाल स्थिर है और किसी को गंभीर खतरा नहीं है।
हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झूला जिस जगह गिरा, वहां से महज दो फीट की दूरी पर बिजली का खंभा था। गिरते समय झूला बिजली की केबल से भी टकराया। यदि तार टूट जाते तो करंट फैलने से जनहानि हो सकती थी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिपाल सिंह मोहबीया ने बताया कि पंचनामा तैयार कर लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में झूले की फिटनेस और सुरक्षा मानकों में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि झूलों की नियमित तकनीकी जांच नहीं की गई थी और न ही सुरक्षा कर्मियों की पर्याप्त तैनाती थी। इसके अलावा, स्कूल के ठीक सामने मेला लगाने और बिजली के तारों के पास भारी झूले लगाने की अनुमति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल ड्रैगन झूले को बंद कर दिया गया है और पूरे मेले की सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जा रही है। प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि मनोरंजन के नाम पर की गई लापरवाही किस तरह मासूम जानों को खतरे में डाल सकती है।