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कलयुगि पिता की करतूत सौतेली बेटी से किया दुष्कर्म, आरोपी को मिली दोहरी उम्रकैद की सजा

इंदौर। इंदौर की पॉक्सो अदालत ने एक ऐसे मामले में कड़ा संदेश दिया है, जिसमें एक सौतेले पिता ने नाबालिग सौतेली बेटी के साथ बार‑बार दुष्कर्म किया और ब्लैकमेलिंग के लिए अश्लील वीडियो बनाए। अदालत ने दोषी को दोहरी उम्रकैद सहित कठोर सजा सुनाई।
इंदौर की जिला एवं सत्र न्यायालय की विशेष रूप से गठित पॉक्सो अदालत ने एक संवेदनशील और जघन्य अपराध में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सौतेले पिता को दोहरी उम्रकैद की सजा दी है। इस मामले ने समाज को झकझोर कर रख दिया, क्योंकि आरोपी ने पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा को तार‑तार करते हुए नाबालिग सौतेली बेटी के साथ लंबे समय तक यौन शोषण किया।
लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौर के अनुसार, मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश नौशीन खान की अदालत में हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, पीड़िता के बयान और मेडिकल‑फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 एवं 6 के तहत दो अलग‑अलग उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, पॉक्सो अधिनियम की धारा 13 व 14 के अंतर्गत सात वर्ष का कठोर कारावास तथा आईटी एक्ट के तहत तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास भी दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि बेहद दर्दनाक है। पीड़िता के पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां ने दूसरा विवाह किया। विवाह के तुरंत बाद ही सौतेले पिता ने नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी, जो आगे चलकर लगातार दुष्कर्म में बदल गई। आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर चुप रहने को मजबूर किया। कुछ समय के लिए घर छोड़कर जाने के बाद वह पुनः लौटा और फिर से अत्याचार शुरू कर दिए।
अपराध को उजागर होने से रोकने के लिए आरोपी ने मां‑बेटी के आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करने का प्रयास किया। इस अमानवीय कृत्य ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया। जांच अधिकारी निरीक्षक सतीश पटेल ने गहन जांच करते हुए ठोस साक्ष्य जुटाए और चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की। सहायक जिला लोक अभियोजक लतिका जामरा ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।
अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और पीड़िता को मानसिक व शारीरिक क्षति के लिए पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत तीन लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाता है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है।

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