बालाघाट : बालाघाट जिले के तत्कालीन कलेक्टर मृणाल मीणा के स्थानांतरण के बाद सोमवार को कुमार सत्यम बालाघाट के कलेक्टर का पदभार ग्रहण करेंगे। बालाघाट कलेक्टर के रूप में कुमार सत्यम ऐसे समय पर बालाघाट के कलेक्टर का पद ग्रहण कर रहे है, जब बालाघाट में कई ज्वलंत मुद्दे हावी है जिनसे कहीं न कहीं जिला प्रशासन की छवि ख़राब हो रही है और जनचर्चा है कि बालाघाट का प्रशासन सत्ता के हाथ की कटपुतली बन बैठा है जो बालाघाट के नेताओं की ईशारे पर नाच रहा है। ऐसे में नवागत कलेक्टर कुमार सत्यम के सामने बड़ी चनौती होगी कि वह बालाघाट के जिला प्रशासन की दागदार छवि को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते है या वह भी उसी राह के राहगीर बन जाते है जिस राह पर पुराने कलेक्टर चलते थे।
कौन है कुमार सत्यम
12 जनवरी 1990 को जन्मे कुमार सत्यम, 2017 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश कैडर में कार्यरत हैं। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में बी.टेक की डिग्री हासिल की है। इनका गृह राज्य उत्तरप्रदेश है। वर्तमान में, कलेक्टर बालाघाट के रूप में इन्हें पदस्थ किया गया है। इसके पूर्व उन्होंने अतिरिक्त कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी के रूप में भी कार्य किया है। कुमार सत्यम समर्पित सेवा के माध्यम से लोक प्रशासन में लगातार योगदान दे रहे हैं।
नवागत कलेक्टर के समक्ष ये होगीं चुनौतियां
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एनजीटी के आदेशों की अवमानना
एनजीटी भोपाल ने बालाघाट शहर के शासकीय देवी तालाब को अतिक्रमण और प्रदुषण मुक्त करने के लिए दिनांक 23/09/2025, 10/11/2025 और दिनांक 27/04/2026 को अंतिम आदेश पारित किया था। उक्त आदेश का पालन कलेक्टर बालाघाट व अन्य की ओर से नहीं किये जाने के कारण याचिकाकर्ता द्वारका नाथ चौधरी और प्रदीप परांजपे की ओर से एनजीटी भोपाल में न्यायाधिकरण के आदेशों की अवमानना के कारण निष्पादन याचिका 13/2026 प्रस्तुत की गई थी। उक्त याचिका में दिनांक 24/07/2026 को न्यायाधिकरण ने कलेक्टर बालाघाट समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में जवाब तलब किया है। कलेक्टर बालाघाट ने एनजीटी भोपाल के आदेश के पालन के लिए बालाघाट एसडीएम गोपाल सोनी को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। किन्तु उनके द्वारा एनजीटी के आदेशो का पालन न करते हुए भूमाफियाओं का साथ दिया जा रहा है।
2. तहसीलदारों की रिपोर्ट पर कार्यवाही या संरक्षण
बालाघाट शहर के देवी तालाब जिसका खसरा नंबर 319 रकबा 16.14 एकड़ एवं अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 1500 करोड़ रूपए है। जिसे पूर्व में राजस्व अधिकारियों, पटवारियों और पूर्व मालगुजार के वारिसों ने मिलीभगत कर अपना नाम दर्ज करा लिया था। उक्त तालाब की भूमि को बाद में ऋषभ डेवलपर्स के भागीदार डॉ. आर.के. जैन, महेंद्र सुराना और पुरनकुमार अडवाणी ने अपने नाम से दर्ज कराया और पानी के कुछ हिस्से को भरकर देवी तालाब में पानी के ऊपर प्लाट बनाकर कुछ प्लाट बेच दिया और शेष लगभग 10 एकड़ भूमि उनके नाम पर शेष है।
वर्ष 2020 में बालाघाट के तत्कालीन तहसीलदार रामबाबू देवांगन ने जांच प्रतिवेदन कलेक्टर बालाघाट के समक्ष प्रस्तुत कर मांग की, कि शासकीय देवी तालाब के खसरा क्रमांक 319 रकबा 16.14 एकड़ भूमि के दो बटांकन माननीय उच्च न्यायालय के अपीलार्थी नारायण सिंह के नाम पर 2 डिसमिल तथा उमराव बी के नाम पर 1 डिसमिल भूमि दर्ज कर शेष भूमि अर्थात 16.11 एकड़ भूमि को शासकीय भूमि दर्ज करने की कार्यवाही किया जाना उचित होगा। लेकिन आज तक कलेक्टर बालाघाट के द्वारा शासकीय देवी तालाब की भूमि को राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि दर्ज नहीं किया गया है।
3. अवैध कालोनाईजर को संरक्षण
एक ओर जहाँ वारासिवनी एसडीएम अपने अधिकार क्षेत्र के अवैध कालोनाईजरों पर लगातार कार्यवाही करते हुए उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा रहे है। वही बालाघाट एसडीएम गोपाल सोनी अवैध कालोनाईजरों पर कार्यवाही के नाम पर मामूली अर्थ दण्ड से दण्डित कर रहे और एसडीएम के आदेशों पर अवैध कालोनाईजरों उच्च न्यायालय जबलपुर से स्थगन प्राप्त कर रहे है क्योंकि उन्हें अवैध कालोनाईजरों पर एफआईआर ने निर्देश जारी करने थे। बाद में औपचारिकता पूरी करते हुए एक-दो सिंगल प्लाट विक्रेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई गई जबकि रसूखदार अवैध कालोनाईजर महेंद्र सुराना, डॉ. आर.के. जैन समेत अन्य लोगों पर एफआईआर की कार्यवाही नहीं करते हुए उन्हें संरक्षण देने का कार्य किया गया है। जिन्होंने बालाघाट शहर ने कई अवैध कालोनियों का निर्माण कर अव्यवस्था फैला रखी है।
4. दान की भूमि की बिक्री
दानवीर स्व. मोहनलाल महेश्वरी की करोड़ो रूपए की स्वर्जित संपत्ति को उसकी रजिस्टर्ड वसीयत और जिला न्यायालय बालाघाट के आदेशों के विरुद्ध बालाघाट के तत्कालीन तहसीलदार नितिन कुमार चौधरी और एसडीएम गोपाल सोनी ने मंत्री पद रहते हुए रामकिशोर कांवरे को पद पर रहते हुए अनैतिक लाभ पहुंचाने का घृणित कार्य किया। तत्कालीन तहसीलदार नितिन कुमार चौधरी और एसडीएम गोपाल सोनी ने जिला न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध फौती नामांतरण का आदेश जारी किया और दानदाता की इच्छा के विरुद्ध उसकी स्वर्जित संपत्ति की बिक्री करवाने के षडयंत्र में साथ दिया।
दानदाता ने अपनी स्वर्जित संपत्ति में लगभग साढ़े 10 भूमि को बिक्री कर उससे प्राप्त होने वाली राशि को बालाघाट शहर की विभिन्न संस्थाओं और ट्रस्टों को दान देने के लिए रजिस्टर्ड वसीयत कर रखी थी किन्तु वसीयत के विपरीत उसकी भूमि को तत्कालीन मंत्री रामकिशोर कांवरे और उसके भाई राजकुमार कांवरे, विनोद शर्मा की पत्नी सुमन शर्मा, विनोद शर्मा, प्रमोद साहू, अजय जैन, मनोहर इशरानी के नाम पर बिक्री करा दिया जहाँ पर अवैध प्लाटिंग की जा रही है।
5. एसडीएम बालाघाट का पद बना चुनौती
गोपाल सोनी बालाघाट एसडीएम के पद पर दिनांक 12.04.2023 को पदस्थ हुए थे। जिसके बाद विधानसभा चुनाव के दौरान अनाधिकृत रूप से डाक मत पत्र खोलने के मामले में निलंबित किया गया था, लेकिन निलंबन के बाद फिर से बालाघाट एसडीएम बनाया गया। उसके बाद से ही गोपाल सोनी पर एसडीएम के पद का दुरुपयोग करने और वह भूमाफियाओं का साथ देने के आरोप लगते रहे है।
जैसे महेंद्र सुराना और डॉ. आर.के जैन जैन रसूखदार अवैध कालोनाईजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज न कराना, एनजीटी के आदेशों की अवमानना करना, कल्पना लॉज व गौतम काम्प्लेक्स को ध्वस्त कराना, स्व. मोहनलाल महेश्वरी के द्वारा बालाघाट के विभिन्न ट्रस्टों को दान में दी गई जमीन रामकिशोर कांवरे और परिजनों को बिक्री कराना, देवी तालाब के मामले में उच्च न्यायालय जबलपुर और एनजीटी भोपाल में पृथक-पृथक जवाब दाखिल करना, देवी तालाब के सम्बन्ध में व्यवहार न्यायालय बालाघाट में वर्ष 2011 में राम मोटवानी की ओर से प्रस्तुत वाद में कलेक्टर बालाघाट की ओर से जवाब प्रस्तुत न करना समेत कई कृत्य शामिल है।
कई और ज्वलनशील मुद्दे
वर्तमान समय में बालाघाट जिले में कई ज्वलनशील मुद्दे हावी है जिनसे निपटना नवागत कलेक्टर कुमार सत्यम के बड़ी चुनौती होगी। जैसे एथेनोल के नाम पर बहुचर्चित चावल चोरी मामला, 600 करोड़ रुपयों का डबल मनी काण्ड, नगरपालिका बालाघाट में डीजल चोरी, घटिया निर्माण, मटेरियल सप्लाई में अनियमितता समेत शहर में फैली अव्यस्थाओं से निपटना, शासकीय धान की कस्टम मिलिंग के नाम पर शासकीय धान की चोरी, भटेरा रेल्वे ब्रिज का समय पर निर्माण समेत कई ज्वलंत मुद्दे है।

