लांजी–किरनापुर की सियासत में उबाल: डबल मनी घोटाले से लेकर बेरोज़गारी, किसान संकट और परिसीमन तक—जनता के सवालों के घेरे में हिना कावरे

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बालाघाट। जिले के लांजी–किरनापुर क्षेत्र में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और सियासी पारा लगातार चढ़ता नजर आ रहा है। डबल मनी घोटाले से टूटे परिवारों की आर्थिक त्रासदी, बढ़ती बेरोज़गारी के कारण युवाओं का पलायन, किसानों की सिंचाई और मुआवज़े से जुड़ी परेशानियां, जर्जर सड़कों व स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी तथा प्रस्तावित परिसीमन को लेकर फैलती अनिश्चितता—इन तमाम मुद्दों ने मिलकर क्षेत्र की जनता में असंतोष की गहरी लहर पैदा कर दी है। गांव की चौपाल से लेकर कस्बाई बाजारों तक एक ही सवाल गूंज रहा है—विकास की दिशा क्या है और जिम्मेदारी किसकी है?

इन हालातों के बीच पूर्व विधायक एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कावरे की भूमिका और सक्रियता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। जनता का एक वर्ग मानता है कि विपक्ष की मजबूत आवाज़ के रूप में उनसे और अधिक आक्रामक तेवर की अपेक्षा थी, वहीं समर्थकों का कहना है कि कई मुद्दों को सदन में उठाया गया है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समय लगना स्वाभाविक है।

डबल मनी घोटाला: कई परिवारों की टूटी कमर, “मैडम जी अब तो खोलिए आंखें”

लांजी क्षेत्र में डबल मनी के नाम पर चलाए गए निवेश घोटाले से सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं। मेहनत की कमाई और वर्षों की बचत डूब जाने से कई घरों की आर्थिक रीढ़ टूट गई है। कुछ परिवारों ने कर्ज लेकर निवेश किया था, जिससे अब वे कर्ज और बेरोज़गारी की दोहरी मार झेल रहे हैं। इस लालच के जाल में फंसकर कई परिवार पूरी तरह आर्थिक संकट में आ गए। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार कुछ मामलों में लोगों की जान भी गई और कुछ लोग आज भी अपने घरों से लापता बताए जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जहां एक ओर कई पीड़ित परिवार कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसी पैसे के दम पर आलीशान जीवन जीते नजर आ रहे हैं। ऐसे में पीड़ितों को उम्मीद थी कि दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई होगी, लेकिन अभी तक निर्णायक परिणाम सामने नहीं आ पाए हैं।

किसान और ग्रामीण समस्याओं को लेकर आखिर कब मैदान में उतरेंगी?

क्षेत्र के किसान सिंचाई सुविधाओं की कमी से लंबे समय से परेशान हैं। वर्षा पर निर्भर खेती के कारण उत्पादन अनिश्चित बना रहता है। नहरों और तालाबों के सुधार की मांग कई वर्षों से उठ रही है, लेकिन अपेक्षित कार्य अभी तक पूरी तरह जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। फसल बीमा और मुआवजा वितरण में देरी की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। इसके अलावा कई ग्रामीण सड़कों की जर्जर स्थिति और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

किसानों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी और समयबद्ध समाधान चाहिए। क्षेत्र के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि लांजी–किरनापुर की पूर्व विधायक किसानों के मुद्दों को लेकर मजबूती से सरकार के सामने आवाज उठाएंगी।

बेरोज़गारी, उद्योग-धंधों की कमी और पलायन

क्षेत्र में उद्योग-धंधों की कमी के कारण युवाओं के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कई युवा रोजगार की तलाश में नागपुर, जबलपुर और अन्य बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जब युवा बाहर चले जाते हैं तो बाजार की आर्थिक गतिविधियां भी कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे छोटे व्यापारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ता है।

परिसीमन को लेकर जन चर्चा

लांजी से किरनापुर परिसीमन की चर्चाओं ने क्षेत्र की सियासत को और गर्मा दिया है। जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि नए राजनीतिक ढांचे में उनके क्षेत्र की आवाज कितनी प्रभावी रह पाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन के बाद चुनावी समीकरणों और नेतृत्व की रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

विपक्ष की भूमिका पर सवाल

क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि विपक्षी नेतृत्व—विशेषकर हिना कावरे—को डबल मनी पीड़ितों, किसानों और बेरोज़गार युवाओं के मुद्दों पर और अधिक मुखर होकर सामने आना चाहिए। जनचर्चा यह भी है कि चुनाव में हार के बाद से किसानों और विभिन्न स्थानीय मुद्दों को लेकर बड़े स्तर पर कोई आंदोलन या मजबूत पहल नजर नहीं आई। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में जनता अपने तरीके से जवाब दे सकती है।

त्योहारों में दिखती है पलायन की सच्चाई

होली जैसे त्योहारों पर भी क्षेत्र में बेरोज़गारी की तस्वीर साफ दिखाई देती है। बस स्टैंड और सड़कों पर बाहर काम करने वाले मजदूरों की भीड़ देखकर ऐसा लगता है मानो मेला लगा हो। ये वही लोग हैं जो साल भर रोजगार की तलाश में अपने घर-परिवार से दूर शहरों में काम करते हैं और केवल त्योहारों के समय अपने गांव लौट पाते हैं। कई परिवारों का कहना है कि यदि लांजी-किरनापुर क्षेत्र में उद्योग-धंधे और रोजगार के अवसर होते, तो युवाओं को बाहर पलायन नहीं करना पड़ता।

स्थानीय लोगों का मानना है कि जब पूर्व विधायक हिना कावरे बड़े पदों पर रहीं, तब क्षेत्र में बेरोज़गारी और उद्योगों के विकास को लेकर ठोस पहल की अपेक्षा थी। लोगों का कहना है कि यदि इन मुद्दों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है

जनता की अपेक्षाएं-

  • डबल मनी पीड़ितों को शीघ्र न्याय और राहत
  • स्थानीय स्तर पर उद्योगों की स्थापना और रोजगार सृजन
  • किसानों के लिए सिंचाई और मुआवजा व्यवस्था में सुधार
  • बेहतर सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं
  • परिसीमन को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी

लांजी–किरनापुर की जनता अब केवल घोषणाओं से संतुष्ट नहीं है। क्षेत्र में यह भावना मजबूत हो रही है कि आने वाले समय में वही नेतृत्व स्वीकार किया जाएगा जो जमीन पर काम कर परिणाम दिखाएगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजनीतिक दल और उनके नेता जनता के भरोसे को दोबारा मजबूत कर पाते हैं या नहीं।

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