नई दिल्ली। अगर आप Apple का नया MacBook, iPad, Apple TV या HomePod खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको पहले से कहीं ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। Apple ने अपने कई प्रोडक्ट्स की कीमतों में वैश्विक स्तर पर बदलाव किया है, लेकिन सबसे बड़ा असर भारत में देखने को मिला है। यहां कुछ डिवाइस की कीमतों में 14% से लेकर 70% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत में Apple प्रोडक्ट्स सबसे ज्यादा महंगे हो गए हैं। इसके पीछे रुपये की गिरती कीमत, इंपोर्ट ड्यूटी, जीएसटी और बढ़ती उत्पादन लागत को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
भारत में क्यों बढ़ीं सबसे ज्यादा कीमतें?
जानकारी के मुताबिक, Apple के प्रोडक्ट्स भारत में पूरी तरह तैयार (Fully Assembled) रूप में आयात किए जाते हैं। ऐसे में इन पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी, 18% GST और रुपये की डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोरी का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर मजबूत होने से विदेशी कंपनियों के लिए भारत में सामान बेचना महंगा हो गया है, जिसकी भरपाई अब ग्राहकों से की जा रही है।
Apple का ‘करंसी बफर’ भी हुआ खत्म
IDC इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट नवकेंदर सिंह के अनुसार Apple लंबे समय से भारतीय बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए आंतरिक Currency Buffer का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन रुपये की लगातार कमजोरी और लागत बढ़ने के कारण अब कंपनी को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। यही वजह है कि इस बार कीमतों में एक साथ बड़ा उछाल देखने को मिला।
अमेरिका और यूरोप से भी महंगे हुए Apple प्रोडक्ट्स
नई कीमतों के बाद कई Apple डिवाइस भारत में अमेरिका और यूरोप से भी ज्यादा महंगे हो गए हैं।
- अमेरिका: लगभग 15% से 25% तक बढ़ोतरी
- यूरोप: करीब 20% से 25% तक बढ़ोतरी
- भारत: कई मॉडल्स में 14% से 70% तक कीमत बढ़ी
यानी भारतीय ग्राहकों पर सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ा है।
AI बूम और चिप संकट का भी पड़ा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टैक्स और करेंसी ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे Artificial Intelligence (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर ने भी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मांग बढ़ा दी है। DRAM और NAND Flash Memory जैसी जरूरी चिप्स की कमी के कारण उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसका असर Apple समेत कई टेक कंपनियों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
Apple यूजर्स के लिए बढ़ी चिंता
वहीं भारत Apple के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है, लेकिन नई कीमतों ने लाखों ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। खासतौर पर छात्रों, प्रोफेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए MacBook और iPad खरीदना अब पहले से अधिक महंगा साबित होगा।

