विदिशा: खेतों में काटकर बेचे गए सस्ते प्लॉटों का खेल अब उजागर हो गया है। प्रशासन के सर्वे में जिले में 50 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां मिली हैं, जिसके बाद 25 कॉलोनाइजरों पर FIR के आदेश दिए गए हैं। इनमें से 16 के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है, वहीं करीब 30 कॉलोनियों की रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक लगा दी गई है।
सस्ते प्लॉट के लालच में लोगों ने खेतों में काटे गए प्लॉट खरीद लिए। कॉलोनाइजरों ने सड़क, पानी और नाली जैसी सुविधाएं नहीं दीं। अब मकान बनाने के बाद रहवासी परेशान हैं।
कई लोगों ने प्लॉट खरीदते समय कॉलोनी की वैधता, विकास की अनुमति और मूलभूत सुविधाओं की जानकारी नहीं ली। अब वे सड़क, पानी और नाली जैसी सुविधाओं के लिए नगर पालिका और कलेक्ट्रेट के चक्कर लगा रहे हैं।
डाबर से सुनपुरा तक अवैध कॉलोनियों के मामले
विदिशा ग्रामीण तहसील के डाबर, तमोरिया, मिर्जापुर, जीवाजीपुर, चिड़ौरिया मूना, गुरारिया हवेली और सुनपुरा में अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों के कई कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। तमोरिया की नारायण धाम कॉलोनी का नाम भी संबंधित मामलों में शामिल है।
वैध कॉलोनियों में सुविधाएं नहीं मिलीं तो होगी कार्रवाई
एसडीएम मनीष जैन ने बताया कि कार्रवाई केवल अवैध कॉलोनियों तक सीमित नहीं है। वैध कॉलोनियों में भी यदि कॉलोनाइजरों ने सड़क, पानी और नाली जैसी सुविधाएं नहीं दी हैं, तो उन्हें नोटिस जारी कर इन्हें विकसित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
नोटिस के बाद भी सुविधाएं नहीं देने पर कॉलोनाइजरों के बंधक प्लॉटों की नीलामी कराई जाएगी। इससे मिलने वाली राशि से कॉलोनी में जरूरी सुविधाएं विकसित कराई जाएंगी।
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प्लॉट खरीदने से पहले इन बातों की जांच जरूरी
अवैध कॉलोनियों के मामलों से साफ है कि सिर्फ कम कीमत देखकर प्लॉट खरीदना नुकसानदायक हो सकता है। खरीदारों को प्लॉट लेने से पहले कॉलोनी की वैधता, विकास की अनुमति, रजिस्ट्री की स्थिति और सड़क-पानी-नाली जैसी सुविधाओं की जानकारी लेनी चाहिए।
प्रशासन के सामने अब अवैध कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई करने के साथ उन परिवारों को राहत देने की चुनौती भी है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यहां मकान बनाए हैं। समय रहते अवैध कॉलोनियों पर निगरानी और कार्रवाई होती, तो कई लोगों को इस परेशानी से बचाया जा सकता था।

