नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ‘सागा ग्रुप पोंजी स्कैम’ के मामले में मुंबई और भोपाल में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 13 से 16 अगस्त के बीच समीर अग्रवाल और उसके सहयोगियों से जुड़े रिहायशी और व्यावसायिक ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान सोने के गहने, चांदी की सिल्लियां, नकदी और अन्य संपत्तियां जब्त की गईं।
तीन से पांच साल में तीन गुना रिटर्न का लालच
ED की जांच के मुताबिक, लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) और उससे जुड़ी अन्य सहकारी समितियों के जरिए लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया गया। निवेशकों से तीन से पांच साल में रकम दोगुनी या तिगुनी करने और कार जैसे महंगे तोहफे देने का वादा किया गया था।
एजेंसी का आरोप है कि इस योजना के जरिए लोगों से धोखे से 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए गए। निवेशकों को रिटर्न देने के लिए किसी वास्तविक कारोबारी गतिविधि के बजाय फर्जी बैंकिंग ढांचे और अवास्तविक रिटर्न के वादों का इस्तेमाल किया गया।
छापे में करोड़ों की संपत्ति जब्त
तलाशी के दौरान ED ने बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए। एजेंसी ने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लिस्टेड शेयर और सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसी और बैंक बैलेंस समेत अपराध से अर्जित संपत्ति को फ्रीज किया है। इसके अलावा नौ महंगी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं।
ED के मुताबिक, कार्रवाई में 1.53 करोड़ रुपये नकद, करीब 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा और लगभग 5.25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के गहने व चांदी की सिल्लियां बरामद हुई हैं।
50 से ज्यादा शेल कंपनियों का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि निवेशकों से जुटाई गई अधिकांश रकम नकद में इकट्ठा की जाती थी। इसके बाद इसे क्षेत्रीय कैश चेस्ट के जरिए भेजा जाता था। प्रमोटरों ने कथित तौर पर शेल कंपनियों और हवाला चैनलों का इस्तेमाल कर रकम को देश-विदेश में संपत्तियों में लगाने के नाम पर खपाया।
ED ने जांच में 50 से ज्यादा शेल कंपनियों के नेटवर्क का पता लगाया है। एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों को उसके द्वारा चिन्हित ऑपरेटर नियंत्रित करते थे।
मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल फरार
ED के मुताबिक, सागा ग्रुप का CMD और मुख्य नियंत्रक बताया जा रहा समीर अग्रवाल देश छोड़कर फरार हो चुका है। एजेंसी ने मामले में दो अलग-अलग प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत संपत्तियां पहले ही अस्थायी रूप से अटैच की हैं।
ग्रुप के एक प्रमुख अधिकारी रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद ED ने 24 जुलाई को विशेष अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की थी।
कई राज्यों में दर्ज FIR के आधार पर जांच
ED ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा LUCC और उससे जुड़ी सहकारी समितियों के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। आरोप है कि वर्ष 2009 से लोगों को रिकरिंग डिपॉजिट, फिक्स्ड डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम में निवेश के नाम पर कथित तौर पर ठगा जा रहा था।

