बालाघाट। बालाघाट जिले के बैहर में दुग्ध शीतलीकरण संयंत्र की शुरुआत से आदिवासी अंचल में दुग्ध क्रांति की नई उम्मीद जगी है। पहले ही दिन 642 लीटर दूध संकलन ने इस पहल की सफलता का संकेत दे दिया।
बालाघाट दुग्ध संघ ने दुग्ध उत्पादकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए बैहर विकासखंड में दुग्ध शीतलीकरण संयंत्र का शुभारंभ किया है। आदिवासी छात्रावास के समीप, मलाजखंड रोड स्थित इस संयंत्र को 13 दिसंबर 2025 से विधिवत प्रारंभ किया गया। पहले ही दिन क्षेत्र की छह दुग्ध सहकारी समितियों से 642 लीटर दूध का संकलन किया गया।
कलेक्टर मृणाल मीना के मार्गदर्शन में नया बैहर‑बिरसा मिल्क रूट शुरू किया गया है। अब तक दूरी अधिक होने के कारण दूध के परिवहन में समय लगता था, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती थी। नए संयंत्र से दूध का त्वरित शीतलीकरण संभव होगा और गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहेगी।
यह संयंत्र 2000 लीटर क्षमता वाले बल्क मिल्क कूलर के रूप में स्थापित किया गया है, जिसकी लागत लगभग आठ लाख रुपये है। इसे जबलपुर दुग्ध संघ द्वारा गुजरात की एक निजी कंपनी से क्रय किया गया है।
बैहर और बिरसा क्षेत्र आदिवासी बहुल एवं नक्सल प्रभावित रहे हैं। ऐसे क्षेत्र में दुग्ध शीतलीकरण संयंत्र की स्थापना न केवल दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय किसानों और पशुपालकों को स्थायी आय का साधन भी उपलब्ध कराएगी।
दुग्ध संघ के इस प्रयास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ेगा। आने वाले समय में दूध संकलन बढ़ने के साथ यह संयंत्र क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण का केंद्र बन सकता है।
बैहर में दुग्ध शीतलीकरण संयंत्र की शुरुआतः आदिवासी अंचल में दुग्ध क्रांति
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