नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता 18 नवंबर को फैसला सुनाएंगे। गुरुवार को अदालत ने मामले के 14वें आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी की ओर से पेश दलीलें सुनीं। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उसके खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
14वें आरोपी के खिलाफ पूरक आरोपपत्र
सीबीआई ने 14 अक्टूबर को शेषराव बजरंग सूर्यवंशी उर्फ राज सूर्यवंशी के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था। इससे पहले अदालत 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान ले चुकी है। अब सभी 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के संबंध में अदालत का फैसला महत्वपूर्ण होगा।
13 आरोपियों के खिलाफ पहले दाखिल हुई थी चार्जशीट
अदालत ने 12 अगस्त को सीबीआई की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिया था। इसमें यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार के नाम शामिल हैं।
इसके बाद 14 अगस्त को अदालत ने सीबीआई को मामले में आगे की जांच करने की अनुमति दी थी। वहीं, 22 अगस्त को आरोपी धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी का मेमो उपलब्ध कराने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी गई थी।
गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
धनंजय लोखंडे ने अपनी गिरफ्तारी को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी और उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
यह भी पढ़ें: संघ के शताब्दी वर्ष पर इंदौर में मंथन, सामाजिक एकजुटता और शाखाओं के विस्तार पर जोर
92 स्थानों पर छापेमारी, 72 अधिकारियों ने की जांच
सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। एजेंसी के अनुसार, 12 मई को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई। जांच में 72 अधिकारियों और आठ साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली गई।
सीबीआई ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की थी। मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई को हुई थी।
अब अदालत 18 नवंबर को यह फैसला सुनाएगी कि 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएं या नहीं। इसके बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

