नई दिल्ली: नॉर्थ कोरिया ने गुरुवार को अपने पूर्वी तट से करीब 10 कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें समुद्र की ओर दागीं। इस घटना के बाद साउथ कोरिया और जापान ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। साउथ कोरिया की सेना के मुताबिक, मिसाइलें वोनसान इलाके से लॉन्च की गईं और करीब 250 किलोमीटर की दूरी तक गईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ये मिसाइलें समुद्र में गिरीं।
दोपहर में किया गया मिसाइल परीक्षण
साउथ कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, मिसाइलों को स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर करीब 12:30 बजे लॉन्च किया गया। सेना अब इनकी तकनीकी क्षमता, उड़ान की दूरी और अन्य जानकारियों का विश्लेषण कर रही है।
जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी मिसाइल लॉन्च की जानकारी मिलने की पुष्टि की। शुरुआती आकलन के मुताबिक, मिसाइलें जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर समुद्र में गिरीं। फिलहाल ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि इन मिसाइलों से जापान के क्षेत्र में सीधे नुकसान हुआ हो।
साउथ कोरिया ने बढ़ाई निगरानी
मिसाइल परीक्षण के बाद साउथ कोरिया ने अपनी निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। उसकी सेना किसी भी नए मिसाइल परीक्षण से निपटने के लिए तैयार है। इस मामले में साउथ कोरिया, अमेरिका और जापान के बीच भी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
साउथ कोरिया ने नॉर्थ कोरिया के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन हैं। उसने नॉर्थ कोरिया से ऐसी गतिविधियां रोकने की अपील भी की है।
पहले से बढ़ा हुआ है दोनों देशों के बीच तनाव
कोरियाई प्रायद्वीप में पिछले कुछ समय से तनाव बना हुआ है। सितंबर में दोनों देशों की सीमा के पास विस्फोटक सुरंगों में हुए धमाकों से साउथ कोरिया के तीन सैनिक घायल हो गए थे। साउथ कोरिया ने इसके लिए नॉर्थ कोरिया को जिम्मेदार ठहराया, जबकि प्योंगयांग ने आरोपों से इनकार किया है।
सीमा पर सैन्य गतिविधियों और प्रचार प्रसारण को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद चल रहा है। ऐसे समय में मिसाइलों का नया परीक्षण क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है।
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अमेरिका और जापान की भी नजर
नॉर्थ कोरिया ने इससे पहले 12 अक्टूबर को भी बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया था। लगातार हो रहे परीक्षणों को उसकी सैन्य क्षमताओं के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, ताजा परीक्षण के पीछे उसका सटीक उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल साउथ कोरिया, जापान और अमेरिका स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में नॉर्थ कोरिया की ओर से कोई नई सैन्य गतिविधि होती है या नहीं, इस पर क्षेत्र के देशों की निगरानी रहेगी।

