मुंबई: टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की राह खुल गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी पंजीकरण वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया है। इसके बाद कंपनी को अपर-लेयर एनबीएफसी के लिए लागू नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा, जिसमें शेयर बाजार में अनिवार्य लिस्टिंग भी शामिल है।
आरबीआई के फैसले की जानकारी टाटा संस के कंपनी सचिव और मुख्य वित्त अधिकारी को शनिवार को भेजे गए पत्र के जरिए दी गई। इसके साथ ही मार्च 2024 में एनबीएफसी पंजीकरण रद्द करने के लिए टाटा संस की ओर से दिया गया आवेदन भी निपट गया।
30 सितंबर 2025 की थी मूल समयसीमा
आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की श्रेणी में रखा था। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना जरूरी है। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर 2025 थी।
अपर-लेयर श्रेणी में बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।
21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुकाया था
टाटा संस ने लिस्टिंग की अनिवार्यता से बाहर निकलने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया था। इसके बाद कंपनी ने एनबीएफसी पंजीकरण वापस लेने के लिए आरबीआई में आवेदन किया था।
हालांकि, आरबीआई ने इस आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद की अपर-लेयर एनबीएफसी सूचियों में भी टाटा संस को शामिल किया।
2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परिसंपत्तियां
जून 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की परिसंपत्तियों वाली एनबीएफसी अपने आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च 2026 तक टाटा संस की परिसंपत्तियां दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं।
अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में शामिल 17 संस्थाओं में टाटा संस एकमात्र गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई थी। सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट मिली हुई है।
अभी IPO की तारीख या आकार तय नहीं
आरबीआई का आवेदन खारिज करने का फैसला टाटा संस के लिए लिस्टिंग की नियामकीय बाध्यता को मजबूत करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी ने आईपीओ की घोषणा कर दी है। शेयर बिक्री का समय, आकार और ढांचा अभी तय होना बाकी है।
टाटा संस की आईटी, वाहन, इस्पात, उपभोक्ता उत्पाद, विमानन, आतिथ्य और वित्तीय सेवाओं समेत टाटा समूह के कई प्रमुख कारोबारों में हिस्सेदारी है।
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टाटा ट्रस्ट्स और शापूरजी पालोनजी समूह की अलग राय
सूत्रों के मुताबिक, टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच मतभेद भी हैं। नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स की कंपनी में 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और वह लिस्टिंग का विरोध करता रहा है।
वहीं, करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह लिस्टिंग के पक्ष में रहा है। समूह का मानना रहा है कि इससे उसकी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर भी बदलाव
यह घटनाक्रम टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के बीच आया है। चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला किया है।

