जयपुर: इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय छोटी सी गलती भी करदाताओं के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। राजस्थान के सीकर से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को आयकर विभाग ने करीब 3.99 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। मामला आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) तक पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद करदाता को बड़ी राहत मिली।
जयपुर ITAT ने 23 सितंबर 2026 को दिए अपने फैसले में आयकर विभाग की ओर से लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया। न्यायाधिकरण ने पाया कि विभाग ने पेनल्टी की कार्रवाई शुरू करते समय आरोप का स्पष्ट कानूनी आधार नहीं बताया था।
क्या था पूरा मामला?
ये बात है साल 2018-19 की। सीकर के एक आदमी ने टाइम पर अपना ITR नहीं भरा था।फिर इनकम टैक्स विभाग ने उसे नोटिस भेजा, तब जाकर उसने अपना रिटर्न भरा और बताया कि उसकी कमाई 12.90 लाख रुपये है।अधिकारी ने सोचा कि अगर नोटिस नहीं भेजते तो ये अपनी कमाई बताता ही नहीं, तो इस वजह से धारा 270A के तहत उस पर पेनल्टी लगा दी।
उसका टैक्स करीब 1.99 लाख रुपये बन रहा था, और विभाग ने उस पर लगभग 3.99 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया, जो टैक्स का लगभग डबल यानी 200% था।
अपील के बाद भी नहीं मिली थी राहत
करदाता ने विभाग के इस जुर्माने को चुनौती दी, लेकिन आयकर आयुक्त (अपील) ने भी विभाग की बात सही मानते हुए पेनल्टी को बरकरार रखा।
इसके बाद ये मामला जयपुर स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण यानी ITAT में पहुंचा। वहां सुनवाई के दौरान करदाता की तरफ से जुर्माना लगाने की पूरी कानूनी प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिए गए।
ITAT ने क्यों रद्द किया जुर्माना?
आखिर में न्यायाधिकरण ने पाया कि विभाग के आकलन आदेश और पेनल्टी नोटिस में ये साफ-साफ नहीं लिखा था कि धारा 270A(9) के किस नियम के तहत गलत रिपोर्टिंग का आरोप लग रहा है।
कानून कहता है कि किसी पर भी जुर्माना लगाने से पहले उसे साफ बताना चाहिए कि उस पर आरोप क्या है और किस आधार पर है, ताकि वो अपना पक्ष रख सके। इस केस में विभाग ने आरोप का सही आधार बताया ही नहीं था।इसी कानूनी खामी को देखते हुए ITAT ने 3.99 लाख रुपये की पूरी पेनल्टी रद्द कर दी।
क्या हर करदाता को मिल सकती है ऐसी राहत?
आयकर अधिनियम की धारा 270A के तहत आय कम दिखाने यानी Under-reporting के मामले में संबंधित टैक्स का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, गलत रिपोर्टिंग यानी Misreporting के निर्धारित मामलों में यह पेनल्टी संबंधित टैक्स के 200 प्रतिशत तक हो सकती है।
हालांकि, जयपुर ITAT के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि आय छिपाने या समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले सभी करदाताओं को जुर्माने से राहत मिल जाएगी। इस मामले में राहत इसलिए मिली क्योंकि विभाग की ओर से जारी नोटिस और पेनल्टी की प्रक्रिया में कानूनी कमी पाई गई थी।
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करदाताओं के लिए जरूरी सीख
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि आयकर विभाग को पेनल्टी लगाते समय कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन करना जरूरी है। केवल आय कम घोषित होने के आधार पर गलत रिपोर्टिंग का आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। आरोप का स्पष्ट कानूनी आधार भी होना चाहिए।
वहीं, करदाताओं को भी अपना ITR समय पर दाखिल करना चाहिए। अगर रिटर्न में कोई गलती रह जाती है, तो कानून में उपलब्ध विकल्पों और निर्धारित समय सीमा के अनुसार उसे सुधारना चाहिए।

