रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने अहम पहल कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का फैसला लिया गया। यह कदम राज्य की कानूनी संरचना में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
कमेटी करेगी ड्राफ्ट तैयार
जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट ने रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति के गठन को मंजूरी दी है। यह समिति विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर UCC का मसौदा तैयार करेगी, जिसे आगे सरकार और विधानसभा में पेश किया जाएगा।
UCC क्या है और क्यों अहम है?
बता दें यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी एक ऐसा कानून, जो सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो चाहे उनका धर्म कोई भी हो। शादी, तलाक, गोद लेना और संपत्ति जैसे निजी मामलों में अभी अलग-अलग धर्मों के अपने कानून हैं, लेकिन UCC लागू होने के बाद एक ही नियम सभी पर लागू होगा। इसे “One Nation, One Law” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
UCC लागू होने से महिलाओं को संपत्ति, उत्तराधिकार और वैवाहिक अधिकारों में समानता मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी और कानूनी प्रक्रियाएं ज्यादा पारदर्शी बनेंगी।
देश में गोवा में लंबे समय से UCC लागू है, जबकि उत्तराखंड और गुजरात भी इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। अब छत्तीसगढ़ भी इस लिस्ट में शामिल होने की तैयारी में है।
साय कैबिनेट के बड़े फैसले
- महिलाओं के नाम जमीन रजिस्ट्री पर 50% स्टाम्प ड्यूटी छूट
- सैनिकों और पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीद में राहत
- उद्योगों के लिए नए निवेश और लोन के रास्ते
- अवैध खनन पर 5 लाख तक जुर्माना
- रेत खदानों के प्रबंधन में सरकारी नियंत्रण
- सभी वर्गों के लिए दुधारू पशु योजना लागू
- पशु टीकाकरण के लिए डायरेक्ट वैक्सीन खरीद
- मध्य प्रदेश से ₹10,536 करोड़ पेंशन राशि वापसी समझौता
- खरीफ सीजन के लिए उर्वरक और LPG सप्लाई पर फोकस
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि UCC से आदिवासी अधिकारों पर असर पड़ सकता है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि राज्य में पहले से लागू PESA कानून और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।


