अमेरिका। मिडिल ईस्ट की जियोपॉलिटिक्स में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिला है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में चल रहे ‘Project Freedom’ को फिलहाल रोकने का ऐलान कर दिया है। यह वही ऑपरेशन था जिसके तहत अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते पर कंट्रोल मजबूत करने और ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था। अब अचानक इस फैसले ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन टकराव से बातचीत की ओर शिफ्ट हो रहा है।
क्यों बदले ट्रंप के तेवर?
सूत्रों के मुताबिक, ईरान के साथ जारी बैकचैनल बातचीत में सिग्निफिकेंट प्रोग्रेस हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच एक फाइनल डील की संभावनाएं मजबूत होती दिख रही हैं। इसके अलावा पाकिस्तान समेत कई देशों ने भी तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाया, जिसने इस फैसले को प्रभावित किया।
हाल के हफ्तों में व्हाइट हाउस से आए बयानों में पहले आक्रामक रुख दिखा था, यहां तक कि सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दी गई। लेकिन अब रणनीति बदलती दिख रही है। ट्रंप ने साफ किया कि अगर बातचीत फेल होती है तो अमेरिकी फोर्सेज मिडिल ईस्ट में बनी रहेंगी, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता नेगोशिएटेड सेटलमेंट है।
क्या पूरी तरह खत्म हुई नाकेबंदी?
‘Project Freedom’ को रोका जरूर गया है, लेकिन समुद्री नाकेबंदी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिका अब भी जहाजों की आवाजाही पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी तरह की बाधा न आए।
ऑयल रूट का बड़ा दांव
बता दें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया का सबसे अहम ऑयल रूट माना जाता है, जहां से करीब 20% ग्लोबल पेट्रोलियम सप्लाई गुजरती है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातक देशों की नजर इस क्षेत्र पर टिकी रहती है। ऐसे में किसी भी तनाव का सीधा असर ग्लोबल मार्केट और फ्यूल प्राइस पर पड़ता है।
डिप्लोमैटिक सर्किल में चर्चा है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता करीब हो सकता है, जिसमें न्यूक्लियर प्रोग्राम, ट्रेड और रीजनल सिक्योरिटी जैसे मुद्दे शामिल होंगे। अगर ऐसा होता है, तो यह मिडिल ईस्ट पॉलिटिक्स में बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

