भोपाल: मध्यप्रदेश में 108 एम्बुलेंस और जननी एक्सप्रेस सेवाओं के संचालन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। करीब 948 करोड़ रुपये के भुगतान में कथित अनियमितताओं की शिकायत के बाद लोकायुक्त कार्यालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन संचालक और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। शिकायत में एम्बुलेंस के संचालन, वाहनों के पंजीकरण, मरीजों के रिकॉर्ड और किलोमीटर के आधार पर किए गए भुगतान पर सवाल उठाए गए हैं?
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और पुनीत टंडन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले को उठाया था। इसके बाद पुनीत टंडन ने शपथ-पत्र के साथ लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सरकारी धन के उपयोग की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
948 करोड़ का भुगतान, एम्बुलेंस संचालन के रिकॉर्ड पर सवाल?
शिकायत के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एम्बुलेंस सेवाएं संचालित करने वाली जय अम्बे इमरजेंसी सर्विस को वर्ष 2024 तक करीब 948 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। कांग्रेस का आरोप है कि इतनी बड़ी राशि मिलने के बावजूद अनुबंध की शर्तों और निर्धारित नियमों के पालन की जांच जरूरी है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ नंबर की एम्बुलेंस चलाई जा रही हैं। इन वाहनों के पंजीकरण, टैक्स भुगतान और संचालन की अनुमति की जांच कराने की मांग की गई है।
मरीजों का रिकॉर्ड अधूरा होने का आरोप
डिंडोरी और शहडोल जिलों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ रिकॉर्ड में मरीजों के नाम, मोबाइल नंबर और कॉल करने वाले व्यक्ति की जानकारी दर्ज नहीं है। केवल एम्बुलेंस के चले हुए किलोमीटर का विवरण उपलब्ध है।
ऐसे में सवाल उठाया गया है कि जब भुगतान किलोमीटर के आधार पर किया जाता है, तो यात्राओं का सत्यापन किस तरह किया गया। शिकायत में विदिशा जिले में एम्बुलेंस के 500 से 600 किलोमीटर तक चलने के आंकड़ों की भी जांच कराने की मांग की गई है।
कर्मचारियों के वेतन और श्रम कानूनों की जांच की मांग
शिकायत में एम्बुलेंस कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन और ड्यूटी से जुड़े नियमों के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने एम्बुलेंस की लॉगबुक, जीपीएस रिकॉर्ड, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की जानकारी और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का ऑडिट कराने की मांग की है।
लोकायुक्त ने 25 नवंबर तक मांगी रिपोर्ट
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय ने पहले 5 जून 2026 को संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट प्राप्त नहीं होने पर दोबारा पत्र जारी कर 25 नवंबर 2026 तक तथ्यात्मक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पुनीत टंडन ने कहा कि यह मामला प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और जनता के पैसे से जुड़ा है। इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल ये सभी आरोप शिकायत के आधार पर लगाए गए हैं। लोकायुक्त द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने का मतलब आरोप साबित होना नहीं है। संबंधित विभागों की रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

