नई दिल्ली। Budget Session of Indian Parliament का दूसरा चरण आज से शुरू हो गया और पहले ही दिन संसद में राजनीतिक तापमान काफी बढ़ा हुआ नजर आया। सरकार और विपक्ष कई बड़े मुद्दों को लेकर आमने-सामने हैं, जिनमें मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दे शामिल हैं। लगातार हंगामे और विपक्षी नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
मिडिल-ईस्ट संघर्ष पर सरकार का बयान
सदन में विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि- क्षेत्र में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है, इसलिए भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। उनका कहना था कि सरकार ऊर्जा आपूर्ति, कीमतों और जोखिमों का आकलन करते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि भारतीय उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रहें।
हंगामे के बीच बयान
बता दें विदेश मंत्री का बयान उस समय आया जब विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए सदन के वेल तक पहुंच गए। कई सांसदों ने हाथों में पट्टियां और पोस्टर लेकर विरोध दर्ज कराया। इस बीच सदन में शोर-शराबा बढ़ने के कारण स्पीकर को कार्यवाही रोकनी पड़ी।
पहले चरण में क्या हुआ था
बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी के बीच चला था। इस दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा हुई थी। इसी दौरान विपक्षी दलों ने ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया था। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं।
विपक्ष की संयुक्त रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, दूसरे चरण से पहले विपक्षी दलों ने रविवार को रणनीतिक बैठक कर संसद में सरकार को घेरने की योजना बनाई। इस प्रस्ताव पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और वामपंथी दलों सहित कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस इस प्रस्ताव से दूरी बनाए हुए है।
बजट सत्र के इस चरण में कई अहम विधेयकों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहस होने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद का माहौल और ज्यादा गरमाने की संभावना जताई जा रही है।


