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हॉस्टल में रह रही 9वीं की छात्रा बनी मां, सुरक्षा पर उठें सवाल

ओडिशा। कंधमाल जिला से सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने सरकारी स्कूलों और छात्रावासों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिरिंगिया ब्लॉक के एक सरकारी हाई स्कूल में पढ़ने वाली 9वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा, जो स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी, हाल ही में मां बन गई। यह मामला सामने आते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और छात्राओं की सुरक्षा व स्वास्थ्य जांच व्यवस्था पर बहस शुरू हो गई।

छुट्टियों में हुई गर्भवती

जानकारी के अनुसार यह घटना नेदीपदर हाई स्कूल से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि पिछले साल स्कूल की छुट्टियों के दौरान छात्रा अपने गांव गई थी। इसी दौरान वह अपने इलाके के एक युवक के संपर्क में आई और कथित तौर पर उसके साथ संबंध बनने के बाद गर्भवती हो गई। छुट्टियां खत्म होने के बाद छात्रा फिर से हॉस्टल लौट आई और पहले की तरह नियमित रूप से कक्षाओं में भाग लेने लगी।

महीनों तक किसी को नहीं चला पता

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि छात्रा कई महीनों तक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती रही, लेकिन स्कूल प्रशासन, वार्डन या किसी भी कर्मचारी को उसकी गर्भावस्था की जानकारी नहीं हो सकी। जब उसके शरीर में बदलाव साफ नजर आने लगे, तब स्कूल प्रबंधन को शक हुआ। इसके बाद तुरंत उसके परिवार को सूचना दी गई और छात्रा को घर भेज दिया गया।

1 मार्च को दिया बच्चे को जन्म

परिजनों के अनुसार 1 मार्च 2026 को छात्रा ने अपने घर पर एक बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने की खबर भी सामने आई है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए है और इलाज जारी है।

पुलिस जांच शुरू

मामला सामने आने के बाद स्कूल के हेडमास्टर और छात्रा के परिवार ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं कंधमाल के जिला कल्याण अधिकारी रबी नारायण मिश्रा ने कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्कूल प्रशासन, वार्डन या किसी भी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था पर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं के लिए बने हॉस्टलों में नियमित स्वास्थ्य जांच, काउंसलिंग और सुरक्षा निगरानी बेहद जरूरी होती है। ऐसे में महीनों तक किसी छात्रा की गर्भावस्था का पता न चलना व्यवस्था में गंभीर खामी की ओर इशारा करता है।

 

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