भोपाल/सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए अपनी ही पार्टी की सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच मतभेद की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे शिवराज
सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने की जानकारी मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान प्रभावित लोगों से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिवारों की समस्याएं सुनीं और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए।साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति से शिवराज नाराज हो गए। उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से फोन पर बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी दी।
शिवराज ने कहा कि गरीब परिवारों को इस तरह बेघर करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए नए मकान बनवाने और तब तक उनके रहने तथा भोजन की व्यवस्था कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिन गरीब परिवारों ने भाजपा का समर्थन किया, आज उन्हें ही ऐसी परेशानी का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मांगी जांच रिपोर्ट
मामले में शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी संज्ञान लिया। उन्होंने प्रशासन से रिपोर्ट मांगते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की बात कही।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान प्रभावित आदिवासी परिवारों के लोग भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने उनकी समस्याएं सुनीं और मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई तथा समाधान का आश्वासन दिया।
भाजपा के भीतर मतभेद की चर्चा तेज
इस घटनाक्रम ने प्रदेश भाजपा के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। शिवराज सिंह चौहान का अपनी ही पार्टी की सरकार के प्रशासनिक फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक गलियारों में दोनों नेताओं के बीच मतभेद की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मौजूदा सरकार के कुछ फैसलों को लेकर शिवराज समर्थकों में असंतोष है।
शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और प्रदेश में उनकी मजबूत राजनीतिक पहचान रही है। ऐसे में आदिवासी परिवारों के मुद्दे पर उनका सक्रिय होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रभावित आदिवासी परिवारों के पुनर्वास और प्रशासन की जवाबदेही का है। मकान तोड़ने की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और क्या संबंधित परिवारों को पहले पर्याप्त सूचना दी गई थी, यह जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा।

