नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल एक छात्र को ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किए जाने पर नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि अदालत पहले ही छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट आदेश दे चुकी है। इसके बावजूद मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किया जाना हैरान करने वाला है।
‘हम स्पष्टीकरण मांगेंगे’-सीजेआई
मामले पर नाराजगी जताते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि युवाओं के खिलाफ कार्रवाई का कोई सवाल ही नहीं है, क्योंकि अदालत इस संबंध में स्पष्ट आदेश पारित कर चुकी है।उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी किया। CJI ने कहा, “हम स्पष्टीकरण मांगेंगे। उन्हें बताने दीजिए कि ऐसा क्यों किया गया।”
छात्र से मांगा गया था पांच लाख रुपये का निजी मुचलका
अधिकारियों के मुताबिक, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में नोटिस जारी किया गया था।ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने छात्र से शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा था। यह नोटिस 4 सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत जारी किया गया था। बाद में इसे वापस ले लिया गया।
छात्र ने आरोपों से किया इनकार
अक्षत त्रिपाठी ने प्रदर्शन में शामिल होने की बात से इनकार नहीं किया, लेकिन आरोपों पर आपत्ति जताई। उसका कहना है कि उसने शांतिपूर्वक प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और उस दौरान वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में शामिल नहीं हो रहा था।

