बालाघाट। जिले की किरनापुर तहसील के मुरुकड़ा, मुंडेशरा, बमनगांव, नक्शी, पनगांव, कोसते, कोकना और कड़कना सहित कई गांव इन दिनों कथित अवैध रेत और मुरम खनन के केंद्र बने हुए हैं। क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर रेत और मुरम का अवैध उत्खनन एवं परिवहन किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सूर्यास्त के बाद क्षेत्र की तस्वीर बदल जाती है। शांत गांवों की सड़कों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों की आवाजाही शुरू हो जाती है। नदी-नालों से रेत निकाली जा रही है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों से मुरम का उत्खनन लगातार जारी हो जाता है।
नाबालिगों के हाथों में ट्रैक्टर की स्टेयरिंग
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर ट्रैक्टर चलाने की जिम्मेदारी कम उम्र के लड़कों और नाबालिगों को सौंप दी गई है।
ग्रामीणों के अनुसार कई किशोर बिना किसी वैध ड्राइविंग लाइसेंस और प्रशिक्षण के भारी वाहन चला रहे हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोग मामूली आर्थिक लाभ के लिए बच्चों को इस अवैध गतिविधि का हिस्सा बना रहे हैं। यदि कम उम्र में ही बच्चों को अवैध गतिविधियों से जोड़ा जाएगा तो इसका असर उनके भविष्य पर पड़ेगा। यह प्रवृत्ति आने वाले समय में कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकती है।
रात के अंधेरे में चलता है पूरा खेल
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय तेज रफ्तार से दौड़ते ट्रैक्टर और डंपरों की आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है। कई गांवों में लोग रातभर चैन से सो नहीं पा रहे हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों में भय का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रात 10 बजे के बाद कथित अवैध उत्खनन की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। नदी किनारों और खनन क्षेत्रों में मशीनों की आवाज सुनाई देती है, जबकि ओवरलोड वाहन लगातार खनिज सामग्री का परिवहन करते नजर आते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि रेत और मुरम से लदे वाहन तेज रफ्तार से गांवों की सड़कों पर दौड़ते हैं। इससे न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है, बल्कि करोड़ों रुपए की लागत से बनी सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
किरनापुर पर ही क्यों उठ रहे सवाल?
साथ ही जिले के अन्य क्षेत्रों में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन किरनापुर क्षेत्र में ऐसी कार्रवाई बहुत कम दिखाई देती है। यही वजह है कि लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
पर्यावरण पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
यदि अनियंत्रित तरीके से रेत और मुरम का उत्खनन जारी रहा तो इसका गंभीर असर पर्यावरण पर पड़ सकता है। नदियों से लगातार रेत निकाले जाने से भूजल स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में जल संकट गहरा सकता है। अत्यधिक खनन से नदी-नालों का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होने का खतरा रहता है। इससे कटाव, भू-धंसाव और अन्य पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ सकती हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- कथित अवैध उत्खनन स्थलों की ड्रोन सर्वे के माध्यम से जांच कराई जाए।
- रात में चलने वाले वाहनों की सघन जांच की जाए।
- बिना अनुमति खनन और परिवहन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई हो।
- नाबालिगों से वाहन संचालन कराए जाने के आरोपों की जांच की जाए।
- पर्यावरणीय नुकसान का आकलन कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
किरनापुर में अवैध रेत और मुरम खनन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगेगी? क्या ओवरलोड और बिना अनुमति चल रहे वाहनों पर कार्रवाई होगी? और सबसे बड़ा सवाल क्या किरनापुर की नदियों और पहाड़ियों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे या फिर यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?

