काराकस। वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। हर तरफ चीख-पुकार, मलबे में दबे घर और अपनों की तलाश में भटकते परिवारों की तस्वीरें दिल दहला रही हैं। अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,300 से अधिक लोग घायल हैं। सरकार का दावा है कि करीब 39 हजार लोग अब भी लापता हैं और कई इलाकों में मलबे के नीचे से लोगों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही हैं। राहत और बचाव दल दिन-रात मलबा हटाने में जुटे हैं, लेकिन तबाही इतनी भयावह है कि हर गुजरते घंटे के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ती जा रही हैं।
एक सदी की सबसे भयावह तबाही
बता दें बुधवार शाम आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों ने वेनेजुएला को झकझोर दिया। विशेषज्ञ इसे पिछले 100 वर्षों के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक मान रहे हैं। कई शहरों में बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं, सड़कें फट गईं और हजारों परिवार खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हो गए।

मलबे में दबी हैं हजारों उम्मीदें
सूत्रों के मुताबिक, सबसे ज्यादा तबाही ला ग्वायरा और राजधानी काराकस के आसपास के इलाकों में देखने को मिली। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। कई जगहों पर ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जहां माता-पिता अपने बच्चों का नाम पुकारते हुए रोते नजर आए। कहीं कोई मां अपने बेटे की तलाश में मलबा हटाती दिखी तो कहीं पूरा परिवार अपने किसी सदस्य के जिंदा मिलने की उम्मीद में घंटों खड़ा रहा।
एक महिला भारी कंक्रीट स्लैब के नीचे फंसी मिली। उसका केवल एक पैर दिखाई दे रहा था। कई घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं कई परिवारों को समय रहते बचा लिया गया, लेकिन सैकड़ों लोगों का अब भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
वहीं वेनेजुएला के स्वास्थ्य मंत्री कार्लोस अल्वाराडो ने बताया कि अस्पतालों में लगातार घायलों को लाया जा रहा है। अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टर और मेडिकल टीमें लगातार आपातकालीन सेवाएं दे रही हैं।
राहत कार्यों पर उठे सवाल
आपदा के बाद कई प्रभावित इलाकों में लोगों ने राहत और बचाव कार्यों की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी मशीनें समय पर नहीं पहुंचीं, जिसके चलते कई स्थानों पर आम नागरिक खुद अपने हाथों से मलबा हटाकर लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भीषण त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। फिलहाल भारत सरकार की ओर से राहत सामग्री या NDRF टीम भेजने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
दुनिया बढ़ा रही मदद का हाथ
कई देशों ने वेनेजुएला को मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजने की पेशकश की है। अमेरिका ने भी राहत कार्यों को सुचारु बनाने के लिए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देने का फैसला किया है, ताकि राहत और बचाव अभियान प्रभावित न हो।
हर गुजरता पल बन रहा है जिंदगी और मौत की जंग
वेनेजुएला इस समय सिर्फ भूकंप की तबाही नहीं, बल्कि इंसानी जज्बे की सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रहा है। हजारों परिवार अब भी अपने प्रियजनों की एक झलक पाने की उम्मीद में मलबे के आसपास बैठे हैं। हर बार जब किसी मलबे के नीचे से आवाज आती है, तो बचाव दल के साथ पूरा देश दुआ करने लगता है कि शायद इस बार एक और जिंदगी बच जाए।

