वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को नए प्रतिबंध कानून से राहत देने के अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने इसे अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए अच्छा कदम बताया है। हालांकि उनके इस फैसले को लेकर अमेरिकी राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के कई सांसदों ने रूस को छूट देने पर सवाल उठाए हैं?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने शुक्रवार को एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर कर रूस को नए प्रतिबंध कानून ‘ग्राहम अधिनियम’ के तहत कुछ प्रतिबंधों से छूट देने का फैसला किया। इस कानून को अमेरिकी संसद ने पिछले महीने मंजूरी दी थी।
ट्रंप बोले- लोगों को अभी फैसले का मतलब नहीं पता
शनिवार शाम संवाददाताओं से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि बहुत से लोग अभी उनके फैसले का वास्तविक मतलब नहीं समझ पाए हैं, लेकिन आने वाले समय में उन्हें इसकी अहमियत समझ आएगी।
ट्रंप ने कहा कि उनका फैसला अमेरिका के हित में है और इससे दुनिया को भी फायदा होगा। उन्होंने संकेत दिया कि रूस को प्रतिबंधों में राहत देने के पीछे व्यापक रणनीति है, हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी।
भारत और चीन को भी मिल सकती है राहत
बताया जा रहा है कि इस आदेश के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों को भी राहत मिलेगी। इनमें भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश शामिल हैं। नए प्रतिबंध कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान बताया गया है। ट्रंप के आदेश के बाद इन प्रावधानों को लागू करने में छूट दी गई है।
आदेश के अनुसार, यह राहत तब तक जारी रह सकती है, जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति या विदेश मंत्री संबंधित अधिकारियों से परामर्श के बाद आगे कोई कार्रवाई करने का निर्णय नहीं लेते।
अपनी ही पार्टी के नेताओं ने उठाए सवाल
ट्रंप के फैसले पर अमेरिकी संसद में विरोध देखने को मिला है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के सांसदों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों में नरमी बरतने पर नाराजगी जताई है। रिपब्लिकन सांसद थॉम टिलिस ने इस फैसले को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए सवाल उठाया कि संसद से भारी समर्थन मिलने के बावजूद प्रतिबंध कानून को पूरी तरह लागू क्यों नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रूस को राहत देने से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव कम होगा। टिलिस ने कहा कि अमेरिका को यूक्रेन युद्ध के मामले में रूस के प्रति सख्त रुख बनाए रखना चाहिए।
ऊर्जा कीमतों और यूक्रेन युद्ध पर भी बहस
ट्रंप प्रशासन के फैसले के बाद अमेरिका में ऊर्जा की कीमतों और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी बहस तेज हो गई है आलोचकों का कहना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखना युद्ध समाप्त कराने की दिशा में जरूरी कदम हो सकता है। वहीं ट्रंप ने अपने फैसले को अमेरिका और विश्व के हित में बताया है।
रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने भी इस निर्णय पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध कानून को आगे बढ़ाने वाले लिंडसे ग्राहम इस फैसले से नाराज होते।
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आगे क्या होगा?
रूस को प्रतिबंधों में राहत देने के फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार और अमेरिका की विदेश नीति पर पड़ सकता है। विशेष रूप से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों के लिए अमेरिकी शुल्क नीति महत्वपूर्ण रहेगी।
हालांकि आदेश के वास्तविक कानूनी दायरे और उसके लागू होने की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। फिलहाल ट्रंप अपने फैसले को सही बता रहे हैं, जबकि अमेरिकी सांसदों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं।

