वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर अगले करीब 10 दिनों में फैसला ले सकते हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत को प्रस्तावित प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, इसका फैसला भी ट्रम्प ही करेंगे।
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पारित किया गया है। इसके तहत ऐसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का विकल्प है। हालांकि, किन देशों पर और किस तरह कार्रवाई होगी, इस पर अंतिम निर्णय ट्रम्प को लेना है।
इस बीच, रूस से डीजल खरीदने को लेकर अमेरिकी प्रशासन के रुख ने भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने पर लगी रोक को 7 अप्रैल 2027 तक हटाने का फैसला किया है। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच इस कदम को अहम माना जा रहा है।
प्रतिबंधों के लिए तीन श्रेणियां तय
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी संसद ने प्रतिबंधों के लिए तीन श्रेणियां तय की हैं। इनमें तेल खरीदना, गैस खरीदना और प्रतिबंधों से बचने में मदद करना शामिल है।
गोर के मुताबिक, इन श्रेणियों में आने वाले देशों और संबंधित पक्षों की पहचान आंकड़ों के आधार पर की जाती है। भारत भी कई अन्य देशों के साथ इनमें से एक श्रेणी में आता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर प्रतिबंध लगना तय हो गया है। अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति करेंगे।
अमेरिका में बढ़ीं डीजल की कीमतें
ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में डीजल की कीमतों में तेजी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसकी कीमत बढ़कर 6.28 डॉलर प्रति गैलन हो गई है, जबकि युद्ध से पहले यह करीब 3.70 डॉलर प्रति गैलन थी।
ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रम्प प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले महंगे ईंधन का मुद्दा भी अहम माना जा रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल भेजने की योजना है। आगे चलकर आपूर्ति बढ़ाकर 30 लाख टन तक किए जाने की बात भी कही गई है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी
सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर कहा कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है और कई बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब कुछ छोटे मुद्दों पर चर्चा बाकी है।
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है। अमेरिका भारत के साथ रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और चिप निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है।
गोर ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उनके मुताबिक, भारतीय और अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच साझेदारी से दोनों देशों को फायदा हो सकता है।
यह भी पढ़ें: 1 नवंबर से फोन पर दिखेगा कॉल करने वाले का असली नाम, DoT ने बदले नियम
भारत पर टैरिफ का फैसला क्यों अहम?
अमेरिका की ओर से 100% टैरिफ लगाए जाने की आशंका भारत के लिए चिंता का विषय है। यदि ऐसा कदम उठाया जाता है, तो भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी बाजार में शुल्क का बोझ बढ़ सकता है और दोनों देशों के व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि, फिलहाल भारत पर टैरिफ लगाने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में ट्रम्प का रुख स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा कि भारत को प्रस्तावित कार्रवाई से छूट मिलती है या उस पर नया शुल्क लगाया जाता है।

