वॉशिंगटन: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections 2026) से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। चुनाव से ठीक पहले आए सर्वे में डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पार्टी पर बढ़त मिलती दिख रही है, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में भी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में इन चुनावों को ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव और उनकी सरकार के कामकाज के लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
डेमोक्रेट को 8 फीसदी की बढ़त
सर्वे के अनुसार कांग्रेस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को 46 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 38 प्रतिशत समर्थन प्राप्त हुआ है। दोनों पार्टियों के बीच 8 प्रतिशत अंकों का अंतर है। ये आंकड़े रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं, क्योंकि मिडटर्म चुनाव में कांग्रेस पर नियंत्रण का सवाल सीधे ट्रंप की राजनीतिक स्थिति से जुड़ा हुआ है।
महंगाई बनी अमेरिकी मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता
चुनाव से पहले महंगाई अमेरिकी नागरिकों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है, जिसे सर्वे में 78 प्रतिशत लोगों ने अपनी प्रमुख चिंता बताया है, वहीं निर्दलीय मतदाताओं के रुख ने रिपब्लिकन की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि 50 प्रतिशत निर्दलीय वोटरों ने ट्रंप के खिलाफ वोट करने की बात कही है और मतदान के उत्साह में भी डेमोक्रेट 49 प्रतिशत के साथ रिपब्लिकन के 33 प्रतिशत से आगे हैं, जो नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
टेक्सास और कंसास में भी डेमोक्रेट्स की नजर
इस बार के मिडटर्म चुनाव में टेक्सास और कंसास जैसे राज्यों पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। चुनावी अनुमानों में टेक्सास में जेम्स टालारिको और कंसास में एडम हैमिल्टन के बेहतर प्रदर्शन के संकेत मिल रहे हैं। अगर ये अनुमान नतीजों में बदलते हैं, तो दोनों राज्यों में यह डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि होगी, हालांकि अंतिम तस्वीर मतदान और मतगणना के बाद ही साफ होगी।
सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन ने खर्च किए 947 मिलियन डॉलर
चुनाव प्रचार में खर्च के मामले में रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट की अहम सीटों पर बड़ी रकम झोंक दी है। एडइम्पैक्ट के आंकड़ों के मुताबिक, रिपब्लिकन ने सात महत्वपूर्ण सीनेट सीटों पर प्रचार के लिए करीब 947 मिलियन डॉलर खर्च किए, जो डेमोक्रेट्स से लगभग 320 मिलियन डॉलर अधिक है। वहीं, प्रतिनिधि सभा की 21 कड़ी टक्कर वाली सीटों पर दोनों पार्टियों के खर्च में करीब 14 मिलियन डॉलर का अंतर रहा, जिससे साफ है कि रिपब्लिकन ने सीनेट मुकाबलों पर ज्यादा जोर लगाया है।
ट्रंप के लिए क्यों अहम हैं मिडटर्म चुनाव?
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं, जिसमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 और सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों पर मतदान होता है। नतीजे तय करते हैं कि दोनों सदनों में किसका नियंत्रण रहेगा। अगर डेमोक्रेट्स किसी सदन में बहुमत हासिल करते हैं, तो ट्रंप प्रशासन के लिए कानून बनाना और नीतियां आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाएगा, जबकि रिपब्लिकन के लिए बहुमत बनाए रखना ट्रंप की राजनीतिक ताकत के लिए अहम होगा।
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दुनिया की नजर अमेरिकी चुनाव पर
अमेरिका की नीतियों का असर केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। व्यापार, टैरिफ, रक्षा सहयोग, वीजा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी फैसलों का असर भारत समेत दुनिया पर पड़ता है। ऐसे में 2026 के मिडटर्म चुनाव के नतीजे भारत-अमेरिका संबंधों और अमेरिकी विदेश नीति की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। फिलहाल सर्वे में डेमोक्रेट्स की बढ़त ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी मतदाता ही करेंगे।

