वॉशिंगटन: ईरान के साथ संघर्ष के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पश्चिम एशिया के लिए एक नई Post-War Strategy तैयार कर रहा है। इस योजना का मकसद ईरान पर क्षेत्रीय दबाव बढ़ाने के साथ-साथ इजरायल और उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है। यह रणनीति अभी तैयार की जा रही है और इसके अंतिम स्वरूप पर काम जारी है।
ईरान के खिलाफ मजबूत क्षेत्रीय मोर्चा
प्रस्तावित योजना में अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगी देशों को ईरान के खिलाफ ज्यादा मजबूत और समन्वित ढांचे में लाने पर ध्यान दे सकता है। इस व्यवस्था में अमेरिका की भूमिका सुरक्षा गारंटर के तौर पर भी हो सकती है।
रणनीति का एक उद्देश्य ईरान को क्षेत्रीय स्तर पर अलग-थलग करना और उसके प्रभाव को सीमित करना है। इसके लिए सुरक्षा, कूटनीति और आर्थिक दबाव को एक साथ इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इजरायल के लिए नई कूटनीतिक दिशा
ट्रंप प्रशासन इजरायल को अपने पड़ोसी अरब देशों के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकता है। योजना में Abraham Accords को आगे बढ़ाना और इजरायल-सऊदी अरब के बीच Normalization Agreement की संभावनाओं को मजबूत करना प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
इसके अलावा गाजा में युद्ध के बाद की व्यवस्था, इजरायल-सीरिया के बीच सुरक्षा समझौता और इजरायल-लेबनान समझौते को लागू करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
आगे क्या होगा?
इस रणनीति की राह में इजरायल और अमेरिका की घरेलू राजनीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को Knesset चुनाव निर्धारित हैं, जबकि अमेरिका में नवंबर 2026 में Midterm Elections होंगे।
फिलहाल यह योजना अंतिम नीति नहीं बनी है। आने वाले हफ्तों में इसमें बदलाव संभव है। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगी इस प्रस्तावित ढांचे में किस हद तक शामिल हो पाते हैं और इजरायल की अगली सरकार इसका कितना समर्थन करती है।

