भोपाल:मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह योजना के पोर्टल को दोबारा खोलने को लेकर सरकार के ही दो मंत्रियों के अलग-अलग बयान हैं। मंत्रियों के विरोधाभासी बयानों के बाद योजना के नए पंजीयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
लाड़ली बहना योजना को लेकर सामने आए इन बयानों ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि क्या योजना का पोर्टल दोबारा खोला जाएगा या फिलहाल नए पंजीयन का इंतजार करना होगा। हालांकि, इस संबंध में सरकार के अंतिम फैसले और आधिकारिक घोषणा पर नजर बनी हुई है।
क्या है पूरा मामला
स्वास्थ्य राज्य मंत्री का बयान राज्य के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने एक बयान में दावा किया था कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर लाडली बहना योजना के पोर्टल दोबारा खोले जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि सीएम ने योजना से छूटी हुई महिलाओं के नामों को जोड़ने और उनका आंकलन करने के आंतरिक निर्देश दिए हैं।
मंत्री निर्मला भूरिया ने किया खंडन
इस बयान के ठीक बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने इन तमाम दावों को खारिज कर दिया। उनका साफ तौर पर कहना था कि फिलहाल लाडली बहना योजना का पोर्टल खोलने की कोई योजना नहीं है और न ही इसमें फिलहाल कोई नए नाम जोड़े जाएंगे।
बयान के बाद मंत्रियों के बीच दिखी खींचतान
निर्मला भूरिया ने यहां तक कह दिया कि कुछ मंत्री बयान दे देते हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है। विभागीय मंत्री की इस दो टूक टिप्पणी से यह साफ हो गया कि योजना के पोर्टल को दोबारा खोलने को लेकर सरकार के भीतर एकरुपता या आधिकारिक पुख्ता निर्णय का अभाव है।
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प्रदेश की राजनीति में गेम-चेंजर साबित हुई योजना
लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश की राजनीति में गेम-चेंजर साबित हुई है। राज्य की लाखों महिलाओं को आर्थिक संबल देने वाली इस योजना से जुड़ने के लिए छूटी हुई महिलाएं लगातार उम्मीद लगाए बैठी रहती हैं। ऐसे में, सरकार के जिम्मेदार मंत्रियों की ओर से ही इस तरह के विरोधाभासी बयान आना कई सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर खुद मुख्यमंत्री कार्यालय या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तरफ से क्या आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाती है, जिससे इस असमंजस पर विराम लग सके।

