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जहरीली शराब से त्रस्त ग्रामीणों का फूटा गुस्साः सड़क पर बोतलें फोड़ीं, शराबबंदी की उठी मांग

जबलपुर। जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतों और अवैध कारोबार से परेशान ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है। जबलपुर के ग्रामीण इलाकों में प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ लोगों ने खुद मोर्चा संभाल लिया। सड़क पर उतरकर शराब की बोतलें फोड़ना केवल विरोध नहीं, बल्कि सिस्टम को चेतावनी भी है।
जबलपुर। जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब का कारोबार अब सामाजिक संकट का रूप लेता जा रहा है। जहरीली शराब से होने वाली मौतों और खुलेआम बिक रही शराब ने ग्रामीणों के बीच आक्रोश भर दिया है। प्रशासन से बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से नाराज़ ग्रामीणों ने अब खुद विरोध का रास्ता अपनाया है।
गुरुवार को सिहोरा थाना क्षेत्र के खमरिया, बरगी और खिरवा गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क पर अवैध शराब की बोतलें छीनकर फोड़ दीं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के इलाकों से लाकर खुलेआम शराब बेची जा रही है। युवा नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं और कई परिवार जहरीली शराब के कारण अपनों को खो चुके हैं। दो माह पहले भी ग्रामीणों ने सिहोरा थाने का घेराव कर अवैध शराब पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
गुस्साए ग्रामीणों के सड़क पर उतरने की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि तब तक शराब तस्कर मौके से फरार हो चुका था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाइश दी और मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया है कि अवैध शराब के नेटवर्क पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद खिरवा, खमरिया और बरगी गांवों में पूर्ण शराबबंदी की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक शराब की अवैध बिक्री बंद नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे और सामाजिक बर्बादी रुकने वाली नहीं है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि तस्करों को कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है, तभी बार-बार शिकायतों के बावजूद कारोबार फल-फूल रहा है। ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन प्रशासन के लिए साफ संदेश है कि अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन और तेज़ हो सकता है।
यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी का भी है, जिस पर प्रशासन की अग्निपरीक्षा अब शुरू हो चुकी है।

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