दुनिया में क्यों नहीं थम रहे युद्ध? मोहन भागवत बोले—एकत्व भूलने से बढ़ रही है कलह

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नई दिल्ली | रूस-यूक्रेन युद्ध अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है कि इसी बीच पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच नया संघर्ष शुरू हो गया है। दुनिया में बढ़ते युद्ध और टकराव के माहौल पर मोहन भगवत ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मानवता आज अपने मूल एकत्व को भूलती जा रही है, इसलिए दुनिया में झगड़े और युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहे। उनका कहना था कि लोग करुणा और आपसी भाईचारे की भावना से दूर हो गए हैं, जबकि सच्चाई यह है कि दिखने में अलग होने के बावजूद हम सब एक ही मानव परिवार का हिस्सा हैं।

संघ प्रमुख यह बात Jaisalmer में जैन समाज के ‘चादर महोत्सव’ के उद्घाटन के दौरान आयोजित धर्मसभा में बोलते हुए कह रहे थे। उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए League of Nations की स्थापना की गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूनाइटेड नेशन का गठन हुआ, लेकिन आज भी दुनिया में संघर्ष और युद्ध जारी हैं।

भागवत ने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव और स्वार्थ की भावना बनी रहेगी, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि हम अपने निजी स्वार्थों को त्यागकर राष्ट्र और समाज के हित में सोचें, तो समाज में एकता मजबूत होगी और आपसी संघर्ष स्वतः खत्म होने लगेंगे। उनके मुताबिक ऐसा समाज ही देश को समृद्ध और शक्तिशाली बना सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी विवाद का समाधान केवल तर्क या समझौते से नहीं निकलता, बल्कि उसके लिए सद्भावना जरूरी होती है। यदि लोगों के मन में एक-दूसरे के प्रति सकारात्मक भावना होगी, तभी समस्याओं का स्थायी समाधान निकल पाएगा। इसलिए समाज में आपसी सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि दुनिया को एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जहां हर व्यक्ति को अपनी आस्था, परंपरा और विचारों के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता मिले। जब समाज भेदभाव, स्वार्थ और शोषण से मुक्त होकर समता की भावना के साथ खड़ा होगा, तभी एक शांतिपूर्ण और सुखद विश्व की कल्पना साकार हो सकेगी।

कार्यक्रम में पहुंचने से पहले भागवत ने शहर की ऐतिहासिक गलियों का दौरा किया और पार्श्वनाथ जैन मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर दादा गुरुदेव की स्मृति में एक स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया। तीन दिवसीय चादर महोत्सव के दौरान देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु सामूहिक रूप से धार्मिक पाठ और अनुष्ठानों में भाग लेंगे।

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