नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने टेक्नोलॉजी सहयोग के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए Pax Silica समझौते की घोषणा की है। इस नई रणनीतिक पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में दोनों देश गहरी साझेदारी करेंगे। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस हाई-इम्पैक्ट टेक एग्रीमेंट का औपचारिक ऐलान किया।
क्या है Pax Silica?
“Pax Silica” दरअसल एक टेक-कोलैबोरेशन फ्रेमवर्क है, जिसका फोकस सिलिकॉन-आधारित टेक्नोलॉजी यानी चिप मैन्युफैक्चरिंग, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करना है। इस समझौते में शामिल होंगे-
- AI रिसर्च और डेवलपमेंट में संयुक्त निवेश
- सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए भरोसेमंद सप्लाई चेन
- रेयर अर्थ मिनरल्स की सुरक्षित उपलब्धता
- उभरती टेक्नोलॉजी में स्किल और इनोवेशन एक्सचेंज
क्यों है यह डील रणनीतिक रूप से अहम?
दरअसल वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई पर चीन का बड़ा प्रभाव रहा है। Pax Silica को एक स्ट्रैटेजिक डिकप्लिंग मूव के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे भारत और अमेरिका टेक सप्लाई में आत्मनिर्भर और अधिक सुरक्षित बन सकेंगे। यह डील भारत के “डिजिटल इंडिया” और “मेक इन इंडिया” विजन को भी नई गति दे सकती है।
भारत के लिए क्या बदलेगा?
- चिप मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट – भारत में सेमीकंडक्टर फेब यूनिट्स को तकनीकी और सप्लाई सपोर्ट मिलेगा।
- AI सुपरपावर बनने की दिशा में कदम – अमेरिकी टेक इकोसिस्टम के साथ गहरी साझेदारी से भारत का AI सेक्टर ग्लोबल रेस में आगे बढ़ सकता है।
- रेयर अर्थ सुरक्षा – इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिफेंस और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को स्थिर सप्लाई मिलेगी।
- रोजगार और निवेश – हाई-टेक सेक्टर में नए जॉब्स और विदेशी निवेश की संभावना।

