बैरसिया: बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित आसपास के गांवों में सोयाबीन की खड़ी फसल पर पीला मोजेक बीमारी के प्रकोप से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि बीमारी के कारण फसल लगातार पीली पड़ रही है और कई खेतों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसानों की समस्या को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे किसानों के साथ एसडीएम कार्यालय बैरसिया पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर तत्काल सर्वे एवं राहत की मांग की।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, जिला कलेक्टर, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री सहित संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक किसानों की समस्या पहुंचाने की मांग की गई। धौलपुरे ने कहा कि किसानों की महीनों की मेहनत खेतों में बर्बाद होने की स्थिति में है, लेकिन प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
प्रभावित गांवों में तत्काल सर्वे की मांग
प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि कई किसानों की सोयाबीन की फसल लगातार पीली पड़ रही है। कुछ किसानों की फसल काफी प्रभावित हो चुकी है, इसके बावजूद अभी तक व्यापक स्तर पर फसल नुकसान का सर्वे शुरू नहीं हुआ है। किसान अपनी समस्या लेकर पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
उन्होंने मांग की कि सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित सभी प्रभावित गांवों में अधिकारियों की टीम भेजकर खेतों का मौके पर निरीक्षण कराया जाए। फसल को हुए नुकसान का निष्पक्ष और पारदर्शी आकलन कर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा एवं राहत राशि उपलब्ध कराई जाए।
विधायक से भी हस्तक्षेप की मांग
धौलपुरे ने क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री से किसानों की समस्या का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा क्षेत्र के किसान अपनी खड़ी फसल खराब होने की शिकायत कर रहे हैं, तब उनकी आवाज को प्रशासन और सरकार तक मजबूती से पहुंचाना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि बैरसिया राजधानी भोपाल से लगा ग्रामीण क्षेत्र है। यदि राजधानी के आसपास के किसान फसल को लेकर परेशान हैं तो प्रदेश के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में किसानों की स्थिति का भी अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार को इसे गंभीर कृषि संकट मानते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान से भी हस्तक्षेप की मांग
प्रवीण धौलपुरे ने देश के कृषि मंत्री एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी प्रदेश में सोयाबीन की फसल को हो रहे नुकसान का संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रदेश के कृषि मंत्री से प्रभावित गांवों में सर्वे और राहत की कार्रवाई के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देने की अपील की।
‘विज्ञापनों में किसान कल्याण, खेतों में किसान बेहाल’
धौलपुरे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर विज्ञापनों में किसान कल्याण और किसानों की खुशहाली के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर किसान अपनी खड़ी फसल बर्बाद होते देख रहा है और समस्या बताने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है।
किसानों की मांग है कि जिन किसानों की KCC नहीं हुई है, उन्हें केवल इस आधार पर राहत से वंचित न किया जाए। साथ ही कृषि विभाग की विशेषज्ञ टीम प्रभावित गांवों में भेजकर बीमारी के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण करे और किसानों को फसल बचाने के लिए आवश्यक सलाह एवं सहायता उपलब्ध कराए।
धौलपुरे ने कहा कि किसान केवल मुआवजा नहीं मांग रहा, बल्कि अपनी मेहनत और आजीविका बचाने की मांग कर रहा है। फसल नुकसान का असर किसान परिवार के घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, कृषि ऋण की अदायगी और अगले कृषि सीजन की तैयारी पर पड़ सकता है।


