उज्जैन: शहर में बढ़ती ट्रैफिक समस्या से राहत दिलाने के लिए 945.20 करोड़ रुपये की लागत से 5.30 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भूमिपूजन के बाद परियोजना पर काम शुरू हो गया है। प्रशासन का लक्ष्य सिंहस्थ 2028 से पहले दोनों एलिवेटेड ब्रिज का निर्माण पूरा करना है।
दो हिस्सों में बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर
परियोजना के तहत इंद्रानगर चौराहे से नीलगंगा चौराहे तक और निकास चौराहे से इंदौर गेट तक एलिवेटेड ब्रिज बनाए जाएंगे। इनके शुरू होने से आगर रोड और पुराने शहर के व्यस्त इलाकों में वाहनों का दबाव कम होगा। यात्रियों को कई चौराहों और रेड सिग्नल पर लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
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निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लेने के लिए संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और अधिकारियों की टीम ने आगर रोड पहुंचकर निरीक्षण किया। अधिकारियों ने निर्माण की स्थिति की जानकारी ली और कार्य में सामने आ रही कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।
सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि इंद्रानगर से नीलगंगा तक एलिवेटेड ब्रिज का काम शुरू हो चुका है, जबकि इंदौर गेट से निकास चौराहे तक बनने वाले दूसरे एलिवेटेड ब्रिज का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा। प्रशासन ने दोनों परियोजनाओं को सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
यह कॉरिडोर सिंहस्थ के दौरान शहर में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के साथ ही उज्जैन के स्थायी ट्रैफिक ढांचे को भी मजबूत करेगा।

