नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अब दो दिन में आरोपपत्र दाखिल करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी। एसआईटी की स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज की जांच में चढ़ावे की चोरी से जुड़ी 105 घटनाओं की पहचान हुई है। टीम ने इन घटनाओं की जांच पूरी होने की बात कही है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पहली गिरफ्तारी के 90 दिन 25 सितंबर को पूरे हो जाएंगे। इससे पहले आरोपपत्र दाखिल नहीं होने पर आरोपियों को वैधानिक जमानत मिलने का आधार बन सकता है। इसी वजह से एसआईटी जल्द आरोपपत्र दाखिल करेगी।
सीसीटीवी जांच में क्या सामने आया?
एसआईटी ने मंदिर और संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की। इसी दौरान चढ़ावे की चोरी की 105 घटनाओं का पता चला। रिपोर्ट में इन मामलों की जांच पूरी होने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, इन घटनाओं में कितनी रकम या कितना चढ़ावा चोरी हुआ और इसमें कितने लोगों की भूमिका सामने आई, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इन बिंदुओं का खुलासा आरोपपत्र में होने की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई स्थिति रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी की स्थिति रिपोर्ट अदालत के सामने रखी। पीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन किया। मामले में दाखिल याचिकाओं में स्वतंत्र जांच समेत विभिन्न मांगें की गई हैं।
अब आरोपपत्र दाखिल होने के बाद जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपों की विस्तृत जानकारी सामने आएगी। खासतौर पर 105 घटनाओं में कथित चोरी की रकम, आरोपियों की भूमिका और जांच से जुड़े अन्य निष्कर्ष स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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25 सितंबर की तारीख क्यों महत्वपूर्ण?
पहली गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने की वजह से 25 सितंबर मामले में महत्वपूर्ण तारीख है। निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं होने पर कानून के तहत आरोपी वैधानिक जमानत का दावा कर सकते हैं। इसलिए एसआईटी के लिए उससे पहले आरोपपत्र दाखिल करना जरूरी है।

