सिंगरौली: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में शनिवार, 17 अक्टूबर को दोपहर भूकंप के झटके दर्ज किए गए। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई। इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे बताया गया है।
जानकारी के मुताबिक, भूकंप दोपहर 2 बजकर 12 मिनट 35 सेकंड पर दर्ज किया गया। इसकी तीव्रता 3.5 थी। भूकंप के केंद्र और तीव्रता से जुड़ी ये जानकारियां शुरुआती आंकड़ों पर आधारित हैं।
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी की बाहरी परत कई टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जहां प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या उनके बीच खिंचाव पैदा होता है, वहां भूगर्भीय दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक जमा हुआ दबाव जब अचानक बाहर निकलता है, तो ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलती है। इसी से धरती में कंपन होता है, जिसे भूकंप कहते हैं।
क्या होता है भूकंप का केंद्र?
भूकंप के दौरान पृथ्वी के भीतर जिस स्थान पर चट्टानों में हलचल शुरू होती है, उसे भूकंप का उद्गम केंद्र कहते हैं। इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित स्थान को अधिकेंद्र या एपिसेंटर कहा जाता है। आमतौर पर अधिकेंद्र के आसपास कंपन ज्यादा महसूस हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव भूकंप की गहराई, तीव्रता, जमीन की प्रकृति और इमारतों की बनावट पर भी निर्भर करता है।
यह भी पढ़ें: रजनीकांत की ‘जेलर 2’ के सामने फीकी पड़ीं नई फिल्में, दूसरे दिन भी बॉक्स ऑफिस पर दबदबा
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?
भूकंप की तीव्रता और उससे निकलने वाली ऊर्जा का आकलन भूकंपीय उपकरणों से दर्ज आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। भूकंप के परिमाण के लिए आजकल मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल का व्यापक इस्तेमाल होता है, जबकि रिक्टर स्केल इसका एक पारंपरिक पैमाना है।
भूकंप का परिमाण बढ़ने के साथ उससे निकलने वाली ऊर्जा भी तेजी से बढ़ती है। हालांकि, किसी क्षेत्र में झटके कितने तेज महसूस होंगे और कितना नुकसान होगा, यह केवल परिमाण से तय नहीं होता। इसमें भूकंप की गहराई, अधिकेंद्र से दूरी और स्थानीय परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं।

