बालाघाट:जिले में बीते तीन महीने में एक संदिग्ध बीमारी से 32 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मौतों का आंकड़ा सरकारी आंकड़े से कहीं ज्यादा है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद कई ग्रामीण अंचलों के बच्चों को तेज बुखार आने के समाचार प्राप्त हुए हैं।
मरछुदा गांव में पांच साल के अंकित मरावी की जानकारी मिली। करीब 15 दिन पहले उसकी तबीयत बिगड़ी थी। उसे बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 10 सितंबर को स्वस्थ बताकर डिस्चार्ज किया गया। घर लौटते ही उसे फिर तेज बुखार आने लगा।
बच्चे की नानी और गांव की सरपंच जिलसो बाई ने बताया कि अंकित के माता-पिता खेत पर गए हैं और वह उनके घर पर है। अब उसे दोबारा इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की तैयारी है।
डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया ने दी जानकारी
बालाघाट के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में अब तक 37 हजार महिला, पुरुष और बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। करीब साढ़े चार हजार लोगों का उपचार किया गया है।
‘स्वदेशी बैगा स्वास्थ्य परीक्षण अभियान’ के तहत पीएचई, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, राजस्व और पंचायत विभाग की टीमें काम कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की 56 टीमें बनाई गई हैं। इनमें करीब 200 कर्मचारी और 40 डॉक्टर शामिल हैं। बाकी नर्स, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता हैं।
सीएमएचओ के मुताबिक, फिलहाल मरीजों की संख्या कम हुई है। 130 बिस्तरों पर 57 बच्चे भर्ती हैं जबकि 490 बच्चों को स्वस्थ होने के बाद घर भेजा जा चुका है।
जमीन पर गद्दे बिछाकर इलाज, खिड़की से लटक रही सलाइन
कुंडेकसा के अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में दो बेड लगाए गए हैं। जमीन पर चार गद्दे बिछे हैं। सभी भरे हैं। खिड़की से सलाइन की बोतलें लटकाकर बच्चों का इलाज जारी है। यहां उसरी गांव के पन्ने ने बताया कि बेटे को भी करीब 15 दिन से बुखार है। दोनों बच्चों के शरीर पर दाने निकले थे और सर्दी-जुकाम के साथ तेज बुखार था। बेटा कुछ ठीक हुआ है, लेकिन बेटी का इलाज चल रहा है। पन्ने का कहना है कि पत्नी को गर्भावस्था के दौरान पोषण आहार नहीं मिला। बच्चों को टीके भी नहीं लगे। पहले जन्म प्रमाणपत्र मांगा गया था, लेकिन अब बीमारी सामने आने के बाद आधार, जन्म प्रमाणपत्र, टीकाकरण और पानी की व्यवस्था तेजी से शुरू हुई है।
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प्रभावित क्षेत्र में फिलहाल टीकाकरण नहीं
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. परितोष शुक्ला ने बताया कि मीजल्स टीकाकरण अभियान 21 अगस्त से चल रहा है। अब तक करीब 22 हजार बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है। अभियान में 9 माह से 15 साल तक के बच्चों को शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल मुख्य प्रभावित क्षेत्र में टीकाकरण नहीं किया जा रहा है। एक्टिव इंफेक्शन वाले क्षेत्र में टीकाकरण नहीं किया जा सकता। आसपास के क्षेत्रों में टीकाकरण कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हालात सामान्य होंगे, प्रभावित क्षेत्र में भी टीकाकरण शुरू किया जाएगा।
जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि जिन क्षेत्रों में बच्चों की मौत हुई, वहां पहले टीकाकरण हुआ था या नहीं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

