भोपाल: यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैस पीड़ितों के चार संगठनों ने दावा किया है कि उनके द्वारा कराई गई पानी की जांच में बड़ी संख्या में नमूने दूषित पाए गए हैं। संगठनों का आरोप है कि प्रभावित इलाकों में सीवेज मिला पानी लोगों तक पहुंच रहा है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
63 सैंपल की जांच, 43 में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा
भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान के अनुसार, इस महीने 30 बस्तियों से पेयजल के 63 नमूने एकत्र किए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर उनका दावा है कि 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म (मल से जुड़े बैक्टीरिया) पाए गए। उनका कहना है कि यह संकेत है कि कई इलाकों में लोगों को दूषित पेयजल मिल रहा है। संगठनों का यह भी दावा है कि बड़ा तालाब (अपर लेक) से सप्लाई होने वाले पानी के अधिकांश नमूने और कोलार डैम से सप्लाई होने वाले कुछ नमूने भी जांच में प्रभावित पाए गए।
जलजनित बीमारियों का बढ़ता खतरा
साथ ही संगठनों का कहना है कि दूषित पानी के कारण प्रभावित क्षेत्रों में दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। उनका आरोप है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों व निजी क्लीनिकों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
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सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का भी किया जिक्र
भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के भूजल को प्रदूषित मानते हुए प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
वहीं, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि वर्ष 2018 में भी सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका दावा है कि अब तक कार्य पूरी तरह पूरा नहीं हो सका है।
स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रभावित क्षेत्रों में सीवर, ड्रेनेज और पेयजल व्यवस्था में सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि पेयजल की गुणवत्ता की नियमित और स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा हो सके।

