चंदेरी से पीथमपुर तक बनेगी नई औद्योगिक श्रृंखला, 11 जिलों को बनाया जाएगा एक्सपोर्ट हब
भोपाल। मप्र अब देश के प्रमुख टेक्सटाइल निर्यातक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 41 से 42 हजार करोड़ रुपए के वस्त्र निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके लिए प्रदेश में टेक्सटाइल उद्योग, कौशल विकास और निर्यात ढांचे को एक साथ मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है।
बुधवार को भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव उद्योग राघवेन्द्र कुमार सिंह ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ ‘स्टेट एक्सपोर्ट एक्शन प्लान’ (एसईएपी) पर चर्चा की। बैठक में केंद्र सरकार की निर्यात नीति के अनुरूप मप्र को वैश्विक वस्त्र बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया। योजना के तहत प्रदेश के 11 जिलों को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
इनमें सीहोर, रायसेन, धार, इंदौर, खरगोन, उज्जैन और भोपाल को ‘चैंपियन जिले’ के रूप में चिन्हित किया गया है, जबकि जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और बुरहानपुर को ‘आकांक्षी जिले’ बनाया गया है। सरकार की रणनीति केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्यात क्षमता विकसित करने पर भी केंद्रित है। इसके तहत एक लाख से अधिक युवाओं को टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रदेश में 1,000 नए निर्यातक तैयार किए जाएंगे।
निर्यात ढांचे को मजबूत करने के लिए पीथमपुर के पास लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से कंटेनर डिपो स्थापित किया जाएगा, जिससे माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी। वहीं धार स्थित पीएम मित्रा पार्क में करीब 30 हजार श्रमिकों के लिए आधुनिक ‘श्रमिक नगर’ विकसित करने की योजना है।
प्रदेश की पारंपरिक वस्त्र कला को भी इस अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। चंदेरी, माहेश्वरी और बाग प्रिंट जैसे प्रसिद्ध हस्तशिल्प उत्पादों को ‘टेक्सटाइल्स ऑफ एमपी’ ब्रांडिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है।
राज्य सरकार 15 मई तक यह विस्तृत कार्य योजना केंद्र सरकार को भेजेगी। इसके बाद जून 2026 में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय वस्त्र शिखर सम्मेलन में मध्यप्रदेश अपनी टेक्सटाइल रणनीति प्रस्तुत करेगा।

