भोपाल। छिंदवाड़ा जिले की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने यह साबित कर दिया है कि यदि तकनीक और रचनात्मकता का सही उपयोग किया जाए, तो सरकारी आंगनवाड़ी केंद्र भी बच्चों के लिए स्मार्ट क्लासरूम बन सकते हैं। परासिया परियोजना के वार्ड क्रमांक-12 में पदस्थ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूनम चौरसिया आज सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल दीदी’ के नाम से पहचान बना चुकी हैं।
पूनम बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल कर रही हैं। कंकड़, पत्थर, रंगीन कागज और घरेलू वस्तुओं की मदद से वे बच्चों को अक्षर ज्ञान, रंगों की पहचान, आकृतियां और अन्य प्रारंभिक गतिविधियां बेहद सरल तरीके से सिखाती हैं। यही वजह है कि छोटे बच्चे पढ़ाई में रुचि लेने लगे हैं और अभिभावकों का भरोसा भी आंगनवाड़ी केंद्रों पर बढ़ा है।
सोशल मीडिया पर भी पूनम की गतिविधियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। उनके यूट्यूब चैनल ‘@parasiawalipoonam’ से 71 हजार 600 से अधिक लोग जुड़े हैं। अब तक वे 6 हजार 800 से ज्यादा वीडियो साझा कर चुकी हैं, जिन्हें 7 करोड़ 48 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी उनके वीडियो को खूब सराहना मिल रही है।
एम.कॉम तक शिक्षित पूनम वर्ष 2020 से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं दे रही हैं। वे भारत सरकार के ‘आधारशिला पाठ्यक्रम’ को पारंपरिक तरीके से पढ़ाने के बजाय गतिविधि आधारित शिक्षा पर जोर देती हैं। उन्होंने ‘पोषण भी-पढ़ाई भी’ अभियान के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया और उत्कृष्ट कार्य के चलते ‘स्टार चैंपियन कार्यकर्ता’ के रूप में चयनित हुईं। इसके बाद उन्होंने ‘निपसिड’ से मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण भी हासिल किया।
वर्तमान में उनके केंद्र में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 43 बच्चे दर्ज हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे नियमित रूप से शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पूनम की कार्यशैली का असर यह है कि कई अभिभावक निजी स्कूलों के बजाय बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र भेजना पसंद कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूनम ने आंगनवाड़ी की पारंपरिक छवि बदलकर उसे आधुनिक और आकर्षक शिक्षण केंद्र का रूप दे दिया है। उनकी पहल अब अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

