भोपाल। मप्र में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी की झोली में संभावित एकमात्र सीट को सुरक्षित रखने की चुनौती के बीच अब नए चेहरे, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक संतुलन को लेकर मंथन शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के दोबारा राज्यसभा नहीं जाने के संकेतों ने पार्टी के अंदर पूरी सियासी तस्वीर बदल दी है।
इसी बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन से मुलाकात ने अटकलों का बाजार और गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में राज्यसभा चुनाव, प्रदेश संगठन की स्थिति और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक सिंघार ने प्रदेश कांग्रेस की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर फीडबैक भी साझा किया।

दरअसल, कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा बदलाव दिग्विजय सिंह के रुख से आया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को संकेत दिए हैं कि इस बार किसी नए चेहरे को राज्यसभा भेजा जाए। साथ ही उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व बढ़ाने की पैरवी भी की है। इसके बाद पार्टी में वरिष्ठ नेताओं से लेकर युवा चेहरों तक की सक्रियता बढ़ गई है। कई नेता दिल्ली स्तर पर संपर्क साधने में जुट गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस बार राज्यसभा उम्मीदवार चयन में केवल अनुभव नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को भी प्राथमिकता दे सकती है। ऐसे में आदिवासी, दलित और युवा नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
उधर, राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा दो सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस को अपनी एक सीट बचाने के लिए पूरी ताकत लगानी होगी। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस सीट निकाल सकती है, लेकिन पार्टी नेतृत्व को क्रॉस वोटिंग की आशंका भी परेशान कर रही है। यदि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो मुकाबला और रोचक हो सकता है। इसी कारण कांग्रेस संगठन अब विधायकों की एकजुटता बनाए रखने और अंदरूनी असंतोष को नियंत्रित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। दिल्ली से भोपाल तक जारी बैठकों का दौर इसी सियासी चिंता का संकेत माना जा रहा है।

