नई दिल्ली। वैश्विक सप्लाई चेन की बदलती राजनीति के बीच भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक समझौता किया है। इस डील को चीन की बढ़ती पकड़ को चुनौती देने वाले अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित, स्थिर और दीर्घकालिक सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए नई साझेदारी का ऐलान किया है।
बता दें यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब दुनियाभर में इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर, बैटरी, AI, डिफेंस और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। अभी इन मिनरल्स की सप्लाई पर चीन का दबदबा माना जाता है। ऐसे में भारत और अमेरिका की यह साझेदारी वैश्विक सप्लाई चेन को नया विकल्प देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
सही समय पर उठाया गया अहम कदम- जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मौजूदगी में कहा कि यह समझौता बेहद सही समय पर हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों देश माइनिंग, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और निवेश के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करेंगे।
साथ ही जयशंकर ने कहा कि इस पहल का मकसद एक मजबूत और विविध सप्लाई चेन तैयार करना है, ताकि भविष्य में किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इससे क्रिटिकल मिनरल्स प्रोजेक्ट्स की फंडिंग और टेक्नोलॉजी साझेदारी को भी गति मिलेगी।
बता दें हाल के महीनों में चीन ने कई रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर नियंत्रण कड़ा किया है। इसके बाद अमेरिका समेत कई देशों ने वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क तैयार करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। भारत के पास भी लिथियम, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं मानी जा रही हैं।
रूबियो ने ‘पैक्स सिलिका’ पहल का किया जिक्र
वहीं मार्को रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए यह जरूरी है कि भविष्य की इनोवेशन इकॉनमी के लिए जरूरी मिनरल्स तक भरोसेमंद पहुंच बनी रहे।
उन्होंने अमेरिका समर्थित ‘पैक्स सिलिका’ पहल का भी उल्लेख किया और कहा कि फरवरी में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ के बाद इस दिशा में तेज प्रगति हुई है।
किन सेक्टरों को होगा सीधा फायदा?
- इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी इंडस्ट्री
- सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग
- डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर
- AI और हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स
- ग्रीन एनर्जी और सोलर टेक्नोलॉजी

