Saturday, November 7, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsबालाघाट में करोड़ों की जमीन पर कब्जे का आरोप, आदिवासी परिवारों ने...

बालाघाट में करोड़ों की जमीन पर कब्जे का आरोप, आदिवासी परिवारों ने कलेक्टर से लगाई सुरक्षा की गुहार

लामता। बालाघाट जिले में आदिवासी परिवारों की पैतृक जमीन पर कब्जे और धमकी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। लामता तहसील के कई गरीब परिवारों ने जिला कलेक्टर से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, विरोध करने पर जान से मारने और फसल काट लेने तक की धमकियां दी जा रही हैं। इस पूरे मामले ने जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजस्व रिकॉर्ड पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

आदिवासी परिवारों का दावा

शिकायत में ग्राम डोंगरवाड़ी, पांडेवाड़ा और मोरिया के रहने वाले कई आदिवासी परिवारों ने बताया कि वे पीढ़ियों से अपनी पैतृक कृषि भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। परिवारों के अनुसार यह जमीन शासन द्वारा उनके पूर्वजों को बसाहट और कृषि उपयोग के लिए दी गई थी। आवेदकों ने दावा किया कि करीब 45 एकड़ कृषि भूमि पर वर्षों से खेती की जा रही है। जमीन अलग-अलग खासरा नंबरों में दर्ज रही है। परिवार मजदूरी और खेती कर अपना जीवन चला रहे हैं। लेकिन अब अचानक कुछ लोग जमीन पर मालिकाना हक जताकर उन्हें बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं।

New Doc 05-29-2026 10.15

गुंडे बुलाकर फसल काटने की धमकी

पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि एक व्यक्ति लगातार जमीन को अपनी बताते हुए उन्हें डराने-धमकाने का काम कर रहा है। शिकायत में कहा गया है कि जबरन कब्जे की कोशिश की जा रही है और खेतों की फसल काट लेने की धमकी दी जा रही है। इसके साथ ही पैसे की भी मांग की जा रही है। वहीं विरोध करने पर गुंडे बुलाने की बात कही जा रही है। परिवारों का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण वे बेहद डरे हुए हैं।

राजस्व रिकॉर्ड में किसी और के नाम मिली जमीन

जानकारी अनुसार, मामले में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब पीड़ित परिवार जमीन के दस्तावेज देखने तहसील पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि उनकी जमीन राजस्व रिकॉर्ड में किसी दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज दिखाई दे रही है। शिकायत के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में बैजन्तीबाई, सुनील, रजनीश और मानसी अनमोल के नाम दर्ज बताए गए हैं। इनका पता आमगांव जिला गोंदिया, महाराष्ट्र बताया गया है। आवेदकों का आरोप है कि उन्होंने कभी जमीन बेची नहीं है, न कोई सौदा किया और न ही किसी को अधिकार दिया। इसके बावजूद जमीन किसी अन्य परिवार के नाम दर्ज हो गई। पीड़ितों का कहना है कि उनकी अशिक्षा और गरीबी का फायदा उठाकर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया हो सकता है।

प्रशासन और राजस्व विभाग पर उठे सवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर आदिवासी परिवारों की जमीन रिकॉर्ड में बदल गई तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। क्षेत्र में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या जमीन से जुड़े दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा हुआ है या किसी स्तर पर मिलीभगत हुई है।

कलेक्टर से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि जमीन कब्जाने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई हो, परिवारों को सुरक्षा दी जाए, जमीन के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए और असली मालिकों को न्याय मिले। परिवारों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गरीब आदिवासी परिवार सड़क पर आने को मजबूर हो जाएंगे।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन