Sunday, June 21, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsखाने के तेल की पैकेजिंग में बड़ा बदलाव, उपभोक्ताओं को मिलेगी आसान...

खाने के तेल की पैकेजिंग में बड़ा बदलाव, उपभोक्ताओं को मिलेगी आसान कीमत तुलना की सुविधा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खाने के तेल की पैकेजिंग को लेकर बड़ा फैसला लिया है। डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत खाद्य तेलों के लिए स्टैंडर्ड पैक साइज अनिवार्य कर दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अलग-अलग ब्रांड्स के उत्पादों की कीमत और मात्रा की आसानी से तुलना करने में मदद करना है।

तीन महीने में लागू होंगे नए नियम

जानकारी अनुसार, सरकार ने तेल उत्पादक कंपनियों और आयातकों को नए नियमों को लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। इस अवधि के भीतर सभी कंपनियों को अपनी पैकेजिंग और लेबलिंग को नए मानकों के अनुरूप बनाना होगा।

नई व्यवस्था के तहत पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल, सनफ्लावर ऑयल, सरसों तेल, मूंगफली तेल, तिल का तेल, राइस ब्रान ऑयल, कॉटनसीड ऑयल, कॉर्न ऑयल और सभी प्रकार के ब्लेंडेड एडिबल ऑयल्स को केवल 9 निर्धारित पैक साइज में ही बाजार में बेचा जा सकेगा।

इससे बाजार में अलग-अलग और असामान्य पैक साइज की संख्या कम होगी तथा उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी आसान बनेगी।

वॉल्यूम और वजन दोनों लिखना होगा

नए नियमों के अनुसार, यदि किसी खाद्य तेल के पैकेट पर मात्रा लीटर या मिलीलीटर में लिखी जाती है, तो उसके साथ बराबर का वजन ग्राम या किलोग्राम में भी स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा। यह नियम घरेलू और आयातित दोनों प्रकार के खाद्य तेलों पर समान रूप से लागू होगा।

छोटे पैकेट्स को मिली राहत

वहीं सरकार ने कम आय वाले उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम क्षमता वाले पैकेट्स को इस नियम से बाहर रखा है। इसके अलावा कम उपयोग वाले कुछ विशेष खाद्य तेलों को भी इस स्टैंडर्डाइजेशन प्रक्रिया से छूट दी गई है।

सरकार का कहना है कि यह फैसला खाद्य तेल उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। इन संगठनों का प्रतिनिधित्व देश के लगभग 90 प्रतिशत खाद्य तेल बाजार में है। इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी बताया है।

क्या है लीगल मेट्रोलॉजी कानून?

बता दें लीगल मेट्रोलॉजी कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैकेटबंद उत्पादों पर दी गई जानकारी पूरी तरह सही हो और ग्राहकों को उतनी ही मात्रा प्राप्त हो जितनी पैकेट पर लिखी गई है। यह कानून उत्पाद के वजन, माप, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP), निर्माण तिथि और अन्य जरूरी जानकारियों की निगरानी करता है ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

Bhopal- 21 to 27 June 2026
Bhopal – 14 to 20 june 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन