नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया जाएगा। इस विधेयक के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 (भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित) करने का प्रावधान किया गया है।
यह विधेयक मई 2026 में जारी किए गए ऑर्डिनेंस की जगह स्थायी कानून का रूप लेगा। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
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गौरतलब है कि ऑर्डिनेंस लागू होने के बाद बढ़ी हुई स्वीकृत संख्या के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है। इस संशोधन के लिए संविधान में किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि जजों की संख्या संसद साधारण कानून के माध्यम से तय कर सकती है।
यही कारण है कि इस विधेयक को पारित करने के लिए संसद में साधारण बहुमत ही पर्याप्त होगा। माना जा रहा है कि यह कदम न्यायपालिका पर बढ़ते कार्यभार को कम करने और आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

