नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन (यूके) के बीच लागू हुआ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) भारतीय अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरा है। उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के प्रभाव से 2030 तक भारत का ब्रिटेन के साथ व्यापार 115 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। साथ ही देश में 7 से 10 लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना भी जताई गई है।
यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता 15 जुलाई से प्रभावी हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कुल व्यापार वर्ष 2025-26 में अनुमानित 58 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 115 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी और निर्यात को भी मजबूत गति मिलेगी।
भारत के सामने क्या हैं सबसे बड़ी चुनौतियां?
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समझौते का पूरा लाभ उठाने के लिए भारतीय कंपनियों को अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धा, उत्पादों की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, मूल नियमों (Rules of Origin) और सस्टेनेबिलिटी मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। इन मानकों पर खरा उतरने से ही भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक स्वीकार्य बन सकेंगे।
सफलता की कुंजी क्या होगी?
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा के अनुसार, व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार, आधुनिक बुनियादी ढांचे में निवेश और मजबूत आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) का विकास इस समझौते की सफलता के प्रमुख आधार होंगे। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में सुधार भारत की निर्यात क्षमता को नई ऊंचाई तक ले जा सकता है।
किन सेक्टरों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग सामान, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम), विनिर्माण और निर्यात आधारित उद्योगों को इस समझौते से सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके एफटीए आने वाले वर्षों में भारतीय उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार के नए द्वार खोलेगा।

