नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान सियासी माहौल उस समय और गरमा गया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी विदेश यात्राओं की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग कर दी। संसद परिसर में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
दरअसल, जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। इसी दौरान मीडिया से बातचीत में निशिकांत दुबे ने कहा कि सरकार से सवाल पूछने से पहले राहुल गांधी को अपनी विदेश यात्राओं और उनसे जुड़े तथ्यों पर देश को जवाब देना चाहिए।
भाजपा सांसद का दावा है कि 2004 से 2026 के बीच राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं रही। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी विदेशों में किन लोगों से मिले, किन संगठनों के साथ बैठकें कीं और उन दौरों का उद्देश्य क्या था। दुबे ने इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।
निशिकांत दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशों में भारत सरकार और देश की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। उनके अनुसार, विपक्ष के नेता के रूप में विदेश यात्रा के दौरान भारत का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए, लेकिन राहुल गांधी ऐसा नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि विदेश यात्राओं से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
भाजपा सांसद ने सरकार से राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता के पद से हटाने के लिए भी प्रस्ताव लाने का प्रयास करेंगे।
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अपने बयान में निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर विदेशी ताकतों से जुड़े होने तथा देश के हितों के खिलाफ काम करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके।
हालांकि, राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में भाजपा सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संसद के भीतर और बाहर जारी इस सियासी टकराव के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या इन मांगों पर सरकार कोई कदम उठाती है या यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है।

