नाउरू: प्रशांत महासागर में स्थित दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश नाउरू ने अपना आधिकारिक नाम बदल दिया है। अब यह देश ‘रिपब्लिक ऑफ नाओएरो’ (Republic of Naoero) के नाम से जाना जाएगा। करीब 12 हजार की आबादी वाले इस द्वीपीय राष्ट्र ने अपनी भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है।
और क्या बदलेगा?
नाम परिवर्तन के साथ देश के कई आधिकारिक पहचान चिह्नों में भी बदलाव किए जाएंगे।
- देश का अंतरराष्ट्रीय कोड NRU से बदलकर NRO किया जाएगा।
- यहां के नागरिक अब ‘नाउरूअन’ (Nauruan) नहीं, बल्कि ‘देई-नाओएरो’ (dei-Naoero) कहलाएंगे।
- नए नाम का आधिकारिक उच्चारण ‘नाउ-एरो’ होगा, जबकि पहले इसे आमतौर पर ‘नाउ-रू’ कहा जाता था।
नाम बदलने की वजह क्या है?
सरकार के अनुसार, यह फैसला देश के पारंपरिक और स्थानीय नाम को फिर से अपनाने के लिए लिया गया है। पहले विदेशी लोगों की सुविधा के लिए देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘नाउरू’ कहा जाने लगा था, क्योंकि स्थानीय नाम का उच्चारण उनके लिए कठिन था।
राष्ट्रपति डेविड एडांग ने जनवरी में संसद में प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि इस बदलाव का उद्देश्य देश की विरासत, भाषा और राष्ट्रीय पहचान का सम्मान करना है। संसद ने आवश्यक मतदान प्रक्रिया के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
क्यों खास है यह देश?
करीब 12 हजार की आबादी वाला यह देश तुवालु और वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है। मूंगे और चूना-पत्थर से बने इस द्वीप पर पहले जर्मनी का नियंत्रण था, जबकि बाद में इसका प्रशासन ऑस्ट्रेलिया ने संभाला। वर्ष 1968 में नाउरू एक स्वतंत्र गणराज्य बना।
फॉस्फेट ने बदली थी किस्मत
1970 के दशक में फॉस्फेट खनन की वजह से नाउरू दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिना जाने लगा था। द्वीप के नीचे मौजूद फॉस्फेट के विशाल भंडार हजारों वर्षों तक पक्षियों की बीट जमा होने से बने थे। हालांकि समय के साथ यह उद्योग लगभग खत्म हो गया और 1990 के दशक में देश गंभीर आर्थिक संकट में पहुंच गया।
आज नाम परिवर्तन के जरिए नाओएरो अपनी ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को फिर से दुनिया के सामने स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

