नई दिल्ली: एयर इंडिया की 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट में टर्बुलेंस की घटना के बाद अब पायलट के डोप टेस्ट को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट के बाद कैप्टन का साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट (डोप टेस्ट) किया गया था, जिसमें उसके पॉजिटिव आने की बात कही जा रही है।
हालांकि, एयर इंडिया ने इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। एयरलाइन का कहना है कि नियमों के तहत फ्लाइट के बाद पायलटों की स्क्रीनिंग की गई थी, लेकिन टेस्ट के नतीजे एयर इंडिया के साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए एयरलाइन फिलहाल रिपोर्ट के परिणाम पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है।
145 लोग थे सवार
मामला एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट से जुड़ा है। एयरबस A320 में कुल 145 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान विमान को ओडिशा के पास तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा, जिसके कारण विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया।
ये भी पढ़े
अमरनाथ यात्रा 2026 20 दिन पहले बंद: खराब मौसम और लैंडस्लाइड के चलते 9 अगस्त से नए जत्थों पर रोक
घटना के बाद दिल्ली पहुंचने पर 13 यात्रियों और 4 क्रू सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मामले के बाद संबंधित फ्लाइट क्रू को एहतियातन उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है।
DGCA कर रहा कई पहलुओं की जांच
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) इस घटना की विस्तृत जांच कर रहा है। जांच में यह देखा जा रहा है कि टर्बुलेंस के दौरान पायलट और क्रू ने स्थिति को किस तरह संभाला।
इसके अलावा जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि घटना केवल मौसम की वजह से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। विमान पर टर्बुलेंस के संभावित तकनीकी प्रभावों की भी जांच की जा रही है। जांच में यह सवाल भी शामिल है कि टर्बुलेंस के बाद विमान को दिल्ली ले जाने के बजाय वाराणसी या लखनऊ जैसे नजदीकी एयरपोर्ट पर डायवर्ट किया जाना चाहिए था या नहीं।
जांच पूरी होने तक फ्लाइंग ड्यूटी से बाहर
प्रोटोकॉल के तहत जांच पूरी होने तक संबंधित फ्लाइट क्रू को उड़ान ड्यूटी से हटाया जाता है। ऐसे में इस फ्लाइट के पायलट भी फिलहाल उड़ान नहीं भर रहे हैं। DGCA के नियमों के मुताबिक, यदि कोई पायलट पहली बार साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन के लिए पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे नशा-मुक्ति और पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। नेगेटिव डोप टेस्ट रिपोर्ट के बाद उसे दोबारा उड़ान ड्यूटी पर लौटने की अनुमति मिल सकती है।
अगर फ्लाइंग ड्यूटी पर लौटने के बाद वही पायलट दूसरी बार पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तीन साल तक निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार पॉजिटिव पाए जाने पर लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान है।
पायलट की भूमिका भी जांच के दायरे में
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों के मुताबिक, कोई भी लाइसेंसधारी व्यक्ति ऐसे साइकोएक्टिव पदार्थों के प्रभाव में उड़ान संबंधी अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जिनसे विमान को सुरक्षित तरीके से संचालित करने की उसकी क्षमता प्रभावित हो।
टर्बुलेंस की घटना की जांच में वैसे भी पायलट द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके की समीक्षा की जानी थी। ऐसे में कैप्टन के कथित डोप टेस्ट पॉजिटिव होने की खबर ने जांच में एक नया पहलू जोड़ दिया है। फिलहाल डोप टेस्ट के कथित नतीजे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और DGCA की जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

