वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक रिपोर्ट ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी। रॉयटर्स और जापान की क्योदो न्यूज एजेंसी ने एक वरिष्ठ ईरानी सरकारी अधिकारी के हवाले से दावा किया कि यदि अमेरिका ईरान पर सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाता है, तो तेहरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल सकता है।
हालांकि, इस दावे के कुछ समय बाद एक अन्य वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने इसे गलत बताया। सीएनबीसी के मुताबिक, एमएस नाउ से बातचीत में ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स और क्योदो की रिपोर्ट को खारिज किया। सीएनबीसी ने भी कहा कि वह इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है। ऐसे में सात दिनों में होर्मुज खोलने की बात को फिलहाल ईरान की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट सामने आते ही तेल की कीमतों में गिरावट
होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की संभावना से जुड़ी खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नरमी देखी गई। सीएनबीसी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 2.6 प्रतिशत गिरकर 97.73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत करीब 3.1 प्रतिशत घटकर 92.40 डॉलर प्रति बैरल रही।
बाजार की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के संभावित खुलने को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, कीमतों में उतार-चढ़ाव भू-राजनीतिक घटनाक्रम, आपूर्ति की स्थिति और बाजार की अपेक्षाओं समेत कई कारकों पर निर्भर करता है।
दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति इस मार्ग से होकर गुजरती है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों की वैश्विक बाजार तक पहुंच में इसकी अहम भूमिका है।
यही वजह है कि होर्मुज में लंबे समय तक किसी तरह का व्यवधान पैदा होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर तत्काल असर पड़ता है। इसके विपरीत, जलडमरूमध्य के दोबारा सुचारू रूप से खुलने की संभावना आपूर्ति संबंधी चिंताओं को कम कर सकती है।
अमेरिका से दबाव कम करने और नाकाबंदी हटाने की कथित शर्त
रॉयटर्स और क्योदो की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से कथित तौर पर होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका से सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाने जैसी शर्तें रखी गई थीं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और वाशिंगटन की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के कदम जारी हैं। अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान से जुड़े वित्तीय संस्थानों और कारोबारी नेटवर्क पर प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।
बाब-अल-मंदेब पर भी दुनिया की नजर
होर्मुज के साथ लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी क्षेत्रीय तनाव के कारण महत्वपूर्ण बना हुआ है। ईरान समर्थित हूती समूह के हमलों के कारण इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है।
होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान की स्थिति में वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा और समुद्री व्यापार के लिहाज से बाब-अल-मंदेब की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब अमेरिका-ईरान के अगले कदम पर नजर
होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों में खोलने की कथित खबर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक पहल की चर्चा जरूर बढ़ा दी है, लेकिन फिलहाल इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी द्वारा रिपोर्ट को गलत बताए जाने के बाद स्थिति और अस्पष्ट हो गई है।
अब निगाहें दोनों देशों की ओर से आने वाले आधिकारिक बयानों पर हैं। यदि होर्मुज को लेकर कोई औपचारिक समझौता या व्यवस्था सामने आती है, तो उसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

