जबलपुर: मध्य प्रदेश की न्यायिक राजधानी जबलपुर से हवाई उड़ानों की बेहद कम संख्या को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के अन्य शहरों की तुलना में जबलपुर की हवाई उपेक्षा पर चिंता जताते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 4 सप्ताह के भीतर सुझाव मांगा है कि जबलपुर से फ्लाइट्स की संख्या किस तरह बढ़ाई जा सकती है।
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी इंजीनियर सुधीर दत्त और विधि छात्र पार्थ श्रीवास्तव की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सरकार को विस्तृत योजना और सुझाव पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में तय की गई है।
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याचिका के प्रमुख और गंभीर बिंदु
जबलपुर में प्रदेश का मुख्य उच्च न्यायालय (High Court), सेना का मध्य भारत एरिया मुख्यालय, गन कैरिज फैक्ट्री और महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठान हैं, इसके बावजूद यहाँ से रोजाना केवल 5 उड़ानों का संचालन हो रहा है।याचिका में आँकड़े पेश करते हुए बताया गया कि इंदौर से रोजाना 80, भोपाल से 30, ग्वालियर से 15 और हाल ही में शुरू हुए रीवा एयरपोर्ट से 20 फ्लाइट्स चल रही हैं।
जबलपुर से देश के पूर्वी और पश्चिमी राज्यों (जैसे मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद आदि) के लिए एक भी सीधी फ्लाइट उपलब्ध नहीं है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सरकार ने जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए 480 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं, लेकिन एयरपोर्ट का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बावजूद देश के प्रमुख हिस्सों के लिए यहाँ से उड़ानें उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
हाई कोर्ट में दायर इस याचिका के बाद अब शहरवासियों को उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में डुमना एयरपोर्ट से नए रूटों के लिए उड़ानों की सौगात मिल सकती है। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख से विमानन मंत्रालय और राज्य सरकार दोनों पर जल्द से जल्द कनेक्टिविटी सुधारने का दबाव बढ़ गया है।

