वॉशिंगटन: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका के तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर वॉशिंगटन पहुंच रहे हैं। यह 11 साल में उनका पहला अमेरिकी state visit है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुद Joint Base Andrews पर शी का स्वागत करेंगे। किसी विदेशी नेता के स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का एयरबेस जाना सामान्य प्रोटोकॉल से अलग और खास माना जाता है।
शी के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंचेंगी। दौरे के दौरान व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत, सैन्य सम्मान और 24 सितंबर को State Dinner आयोजित किया जाएगा।
ट्रेड और टैरिफ पर बड़ी बातचीत
ट्रम्प और शी की बैठक में सबसे अहम मुद्दों में अमेरिका-चीन व्यापार संबंध शामिल होंगे। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से tariffs और trade restrictions को लेकर बातचीत चल रही है। इसके साथ ही चीन की rare earth minerals पर मजबूत पकड़ भी चर्चा का अहम हिस्सा होगी।
मौजूदा trade arrangements से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान 10 नवंबर के आसपास समाप्त होने वाले हैं। ऐसे में दोनों देशों की कोशिश तनाव को नियंत्रित रखने और आगे के व्यापारिक रास्ते तलाशने की होगी।
AI की रेस भी एजेंडे पर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब अमेरिका और चीन के बीच मुकाबले का नया मैदान बन गया है। AI मॉडल्स, एडवांस्ड चिप्स और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े खतरों को लेकर दोनों की नीतियों में काफी अंतर है।
बैठक से पहले AI इमरजेंसी से जुड़ी जानकारी शेयर करने के लिए एक स्पेशल US-China कम्युनिकेशन सिस्टम पर भी चर्चा हुई है, हालांकि इस पर कोई डील पक्की होने की गारंटी नहीं है।
ताइवान पर भी रहेगी नजर
ताइवान अमेरिका और चीन के रिश्तों के सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को रक्षा सहायता और हथियार उपलब्ध कराता रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 14 अरब डॉलर के अमेरिकी arms package का मुद्दा भी चर्चा में है और शी जिनपिंग अमेरिकी हथियार बिक्री पर अपना विरोध रख सकते हैं।
दिग्गज बिजनेस लीडर्स भी होंगे डिनर में
शी जिनपिंग के सम्मान में होने वाले स्टेट डिनर में अमेरिका की टेक और बिजनेस दुनिया के कई दिग्गजों के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें जेफ बेजोस, सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन, एलन मस्क और जेंसन हुआंग जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
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भारत के लिए क्यों अहम यह मुलाकात?
अमेरिका और चीन के रिश्तों में होने वाला बदलाव भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच tariffs में बदलाव होने पर global supply chains प्रभावित हो सकती हैं। इसी तरह AI chips, semiconductors और rare earth minerals पर बनने वाली किसी नई सहमति का असर वैश्विक टेक्नोलॉजी बाजार पर पड़ सकता है।
हालांकि, ट्रम्प-शी बैठक से भारत पर क्या वास्तविक असर पड़ेगा, यह बैठक के बाद होने वाले ठोस फैसलों पर निर्भर करेगा। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से किसी बड़े समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

