नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम निर्देश दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को चार हफ्ते के अंदर चुनाव आयोग के सामने जरूरी जवाब और दस्तावेज जमा करने को कहा है। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के अंदर मामले पर अंतिम फैसला लेना होगा।
इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए करीब चार महीने का समय तय किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर बनी मौजूदा स्थिति लंबे समय तक जारी नहीं रहनी चाहिए।
दो गुटों के बीच चल रहा है विवाद
तृणमूल कांग्रेस में दो गुटों के बीच पार्टी पर नियंत्रण को लेकर विवाद चल रहा है। इसी विवाद के कारण चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत TMC के मूल नाम और उसके ‘Flowers and Grass’ यानी घास-फूल चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था।
इसके बाद दोनों गुटों को चुनाव लड़ने के लिए अलग-अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न दिए गए। ममता बनर्जी के गुट ने चुनाव आयोग के इसी अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
ममता बनर्जी ने खटखटाया था सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा था कि पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न का मामला जल्द तय होना जरूरी है। उनका कहना था कि लंबे समय तक अंतरिम व्यवस्था जारी रहने से चुनावों में परेशानी हो सकती है।
24 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि वह इस विवाद पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लेगा। कोर्ट ने उस समय भी कहा था कि मामले को लंबे समय तक नहीं खींचा जाना चाहिए।
यह भी पढ़ें: फिर शुरू हुई चारधाम यात्रा, जिलाधिकारियों को स्थानीय हालात पर फैसला लेने की छूट
फिलहाल अलग नाम और सिंबल से पहचान
चुनाव आयोग ने फिलहाल TMC के दो गुटों के बीच अंतरिम व्यवस्था की है। ममता बनर्जी वाले गुट को अलग नाम के साथ ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को अलग नाम के साथ ‘लिफाफा’ (Envelope) चिह्न मिला है।

ये सिर्फ अस्थायी फैसला है। TMC के असली नाम और ‘घास-फूल’ वाले चिह्न पर आखिर किसका हक होगा, इसका फाइनल फैसला चुनाव आयोग बाद में करेगा।

